विश्व कप से पहले सभी टीमों को चोटिल खिलाडियों की समस्या से गुज़रना पद रहा है, ICC के नियमों के मुताबिक सभी टीमों के पास बदलाव करने के लिए 9 अक्टूबर तक का समय है. चोटिल खिलाडियों की जिस रफ़्तार से संख्या बढ़ रही है उसे बहुत संभव है कि कई टीमों की घोषित टीमों में कुछ बड़े बदलाव देखने को मिलें। भारतीय टीम भी इस समस्या से जूझ रही है, रविंद्र जडेजा बाहर हो चुके हैं बुमराह और हर्षल की वापसी हुई है मगर पिछले दो मैच जो उन्होंने वापसी के बाद खेले हैं, लय में बिलकुल भी नज़र आ रहे हैं, ऐसे में दीपक हुड्डा का चोटिल हो जाना टीम के लिए एक और सिरदर्द साबित हो रहा है.
विश्वकप से पहले भारत के पास अब दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ सिर्फ तीन मैच हैं, हुड्डा की जगह श्रेयस अय्यर को इस सीरीज़ में शामिल किया गया है. दीपक हुड्डा की चोट के बारे में जो ख़बरें आ रही हैं उनके हिसाब से उनकी कमर की चोट गंभीर किस्म की है. उन्हें दाक्षि अफ्रीका के खिलाफ सीरीज़ से बाहर कर दिया गया है, शायद उन्हें अपनी चोट की रिकवरी के लिए रिहैब के लिए जाना पड़े, भुवनेशवर कुमार को पहले ही भेजा चूका है. ऐसे में यह तय नहीं है कि दीपक हुड्डा विश्व कप से पहले मैच फिट हो सकते हैं. ये सेलेक्टर्स और टीम के कोच और कप्तान के लिए मुश्किल की घडी होती है.
वर्ल्ड कप जैसे बड़े मुकाबले के लिए टीमें एक साल पहले से टीम कॉम्बिनेशन के बारे में ट्राई करती रहती हैं और मुकाबले से एक दो महीने पहले ही टीम फाइनल हो जाती है, ऐसे में अचानक इस तरह चोटें और बदलाव टीम की योजनाओं पर बुरा असर डालती हैं, किसी नए खिलाडी को इतने बड़े टूर्नामेंट के लिए मानसिक तौर पर तैयार करना आसान काम नहीं होता, वैसे भारत के पास एक दुनिया की सबसे अच्छी बैकअप लाइन है इसलिए इतना ज़्यादा चिंतित होने की बात नहीं। जडेजा की जगह टीम में आकर अक्षर पटेल ने उनकी कमी को खेलने नहीं दिया है. हुड्डा के रिप्लेसमेंट के लिए भी श्रेयस अय्यर, संजू सैमसन जैसे नाम हैं जो टीम के दरवाज़े पर मौके की तलाश में खड़े हैं.

