EVM से VVPAT वेरिफिकेशन के मिलान को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने आज अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है, साथ ही पीठ ने चुनाव आयोग से कुछ स्पष्टीकरण भी मांगे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से सवाल करते हुए 4 सवालों के जवाब मांगे थे। इसमें VVPAT में क्या माइक्रोकंट्रोलर को इंस्टॉल किया है? क्या माइक्रोकंट्रोलर सिर्फ एक बार ही प्रोग्रामिंग करता है? चुनाव आयोग के पास कितने उपलब्ध हैं, सिंबल लोडिंग यूनिट? चुनाव याचिका दायर करने की सीमा अवधि 30 दिन है, स्टोरेज और रिकॉर्ड 45 दिनों तक बनाए रखा जाता है लेकिन लिमिटेशन डे क्या 45 दिन है, इसे आपको सही करना होगा।
मामले की सुनवाई के दौरान इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (EVM ) के माध्यम से डाले गए वोटों के साथ वोटर-वेरिफिएबल पेपर ऑडिट ट्रेल (VVPAT) पर्चियों का मिलान करने का निर्देश देने की मांग की गई है। सुप्रीम कोर्ट ने सुबह कहा कि वो बस कुछ स्पष्टीकरण चाहती थी, तथ्यात्मक रूप से हमें पेज पर होना चाहिए। कृपया दोपहर 2 बजे अधिकारी को फोन करें।” पिछली सुनवाई में भी पीठ ने EVM की कार्यप्रणाली को समझने के लिए एक पोल पैनल अधिकारी से व्यापक बातचीत की थी।
चुनाव आयोग की ओर से पेश वरिष्ठ वकील मनिंदर सिंह ने कोर्ट को बताया था कि EVM स्टैंडअलोन मशीनें हैं और उनके साथ छेड़छाड़ नहीं की जा सकती, लेकिन मानवीय त्रुटि की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है। फिर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति दत्ता ने श्री सिंह से कहा कि आपको अदालत के अंदर और बाहर दोनों जगह पैदा आशंकाओं को दूर करना होगा। बेंच ने कहा कि किसी को भी यह आशंका नहीं होनी चाहिए कि जो कुछ शंकाएं अपेक्षित है वह नहीं किया जा रहा है।

