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वेंटिलेटर पर हो गयी थी मौत, लोकप्रिय अस्पताल बताता रहा जिंदा


वेंटिलेटर पर हो गयी थी मौत, लोकप्रिय अस्पताल बताता रहा जिंदा

लोकप्रिय अस्पताल ने बनाया इलाज का मोटा बिल, परिवार से जमा करने को कहा
केंद्रीय गृह सचिव के आदेश पर पहुंची स्वास्थ विभाग की टीम तो मरीज को मृत बताया

मेरठ। कोरोना संक्रमण के दौर में निजी अस्पताल भी भारी-भरकम बिल बनाकर मरीजों को लूटने का मौका नहीं छोड़ रहे। लेकिन उत्तर प्रदेश के जिला मेरठ में लोकप्रिय हाॅस्पिटल अपने यहां भर्ती मरीज की वेंटिलेटर पर मौत हो जाने के बाद भी उसे जिंदा बताकर परिवारजनों से पैसे जमा करने की डिमांड करता रहा। परिवार ने बाहर से दवाएं खरीदी मगर हाॅस्पिटल ने दवाओं का भी भारी बिल थमा दिया। केंद्रीय गृह सचिव के आदेश के बाद डीएम मेरठ ने अधिकारियों को हाॅस्पिटल भेजा तब कहीं पीड़ित परिवार को थोड़ी राहत मिल सकी।

मेरठ के गढ़ रोड स्थित लोकप्रिय अस्पताल में कोरोेना संक्रमित राजेश भाटिया को भर्ती कराया था। राजेश भाटिया के परिवारजनों के अनुसार राजेश भाटिया की हालत गंभीर होने पर उन्हें हाॅस्पिटल ने वेंटिलेटर से स्पोर्ट देनी शुरू कर दी। आरोप है कि बुधवार को हाॅस्पिटल प्रबंधन ने उनसे एक लाख रुपये बकाया जमा कराने को कहा। जबकि वह एक लाख रुपये पहले ही जमा करा चुके थे। राजेश भाटिया के लिये दवाएं आदि भी उन्होंने बाहर से खरीदी लेकिन अस्पताल ने एंटीबाॅयोटिक्स का बिल ही एक लाख से अधिक का बना दिया।

पीड़ित परिवार ने जब हाॅस्पिटल की मनमानी के खिलाफ आवाज उठाते हुए सीएम योगी सहित कई बडे़ नेताओं को ट्वीट किया तो केंद्रीय गृह सचिव संजीव गुप्ता ने मामले को संज्ञान लेकर डीएम मेरठ को पीडित परिवार की मदद करने के आदेश दिये। इससे पहले हाॅस्पिटल ने केंद्रीय गृह सचिव को बताया की राजेश भाटिया वेंटिलेटर पर जिंदा हैं। डीएम के आदेश पर पहुंची स्वास्थ विभाग की टीम ने जांच करनी शुरू की तो आनन-फानन में हाॅस्पिटल ने राजेश भाटिया को मृत घोषित कर दिया।

बताया गया कि स्वास्थ विभाग की टीम ने जांच में अनेक दवाओं का प्रयोग अस्वीकार करते हुए उन्हें बिल से हटा दिया। यदि केंद्रीय गृह सचिव संजीव गुप्ता ट्वीट को संज्ञान में लेकर कार्रवाई के आदेश न देते तो न जानेे कब तक हाॅस्पिटल राजेश भाटिया को वेंटिलेटर पर जिंदा बता कर मोटा बिल बनाता रहता। यह हाल महानगर के अधिकतर अस्पतालों का है जो इस आपदा को भी अवसर में बदलने का कोई मौका नहीं छोड़ रहे। सीएम योगी के आदेश के बावजूद स्वास्थ विभाग मेरठ के निजी अस्पतालों को मनमानी कर मोटा बिल बनाने से रोकने का कोई प्रयास नहीं कर रहे हैं। ऐसे में कोरोना से पीड़ित मरीजों के परिवार को हाॅस्पिटल के उत्पीड़न का शिकार भी होना पड़ रहा है। इस संबंध में अस्पताल प्रबंधन का पक्ष जानने का प्रयास किया मगर उनसे संपर्क नहीं हो पाया।

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