कहते हैं कि भगवान शिव को सावन का महीना सबसे प्रिय है. इस माह में भगवान शिवका जलाभिषेक और आराधना करने से सभी पापों से मुक्ति मिलती है. आज हम आपको भगवान शिव के ऐसे मंदिर के बारे में बताएंगे जहां भगवान भोलेनाथ स्वयं विराजमान रहते हैं और वो पुरे महीने. भगवान शिव की ससुराल के रूप में जाने जाने वाले इस मंदिर में पूरे सावन मास भक्तों का तांता लगा रहता है. ख़ास कर सावन के सोमवार में देश के कोने कोने से आने वाले शिव भक्त यहां जलाभिषेक कर अपनी मन्नत पूरी होने की कामना करते हैं.
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सावन में अपनी ससुराल में विराजमान रहते हैं भोलेनाथ
अभी तक आपने भगवान भोलेनाथ के जितने भी मंदिरों के बारे में सुना होगा. उन मंदिरों में शिवलिंग की पूजा की जाती है. लेकिन आज हम आपको एक ऐसे मंदिर के बारे में बताते हैं जहां भगवान भोलेनाथ स्वयं विराजमान होकर भक्तों का उद्धार करते हैं. उत्तराखंड के प्रवेश द्वार कहे जाने वाले हरिद्वार की उप नगरी कनखल में स्थित भगवान भोलेनाथ का दक्षेश्वर महादेव मंदिर, इसे भगवान भोलेनाथ की ससुराल भी कहा जाता है. माना जाता है कि भगवान भोलेनाथ ने अपने ससुर राजा दक्ष को सावन मास में जहां स्वयं विराजमान रहने का वचन दिया था जिसके बाद हर सावन के माह में भगवान भोलेनाथ यहां विराजमान रहते हैं.
राजा दक्ष को दिया वचन निभा रहे बाबा
कहा जाता है कि भगवान भोलेनाथ और सती के विवाह से राजा दक्ष प्रसन्न नहीं थे जिस कारण से राजा दक्ष ने अपने आयोजित किए हुए बड़े यज्ञ में भगवान भोलेनाथ को आमंत्रित नहीं किया. माता सती को भगवान भोलेनाथ का यह अपमान सहन नहीं हुआ. जिसके चलते माता सती ने राजा दक्ष के यज्ञ कुंड में कूद कर अपनी जान दे दी. जिस पर भगवान भोलेनाथ काफी रुष्ट हुए और उन्होंने राजा दक्ष का सिर काट दिया. लेकिन देवताओं के अनुरोध के बाद भगवान् शंकर ने उन्हें जीवनदान दिया. जिसके बाद राजा दक्ष को अपनी गलती का एहसास हुआ और उन्होंने भगवान भोलेनाथ से क्षमा मांगी. जिसके उपरांत भगवान शिव ने राजा दक्ष को बकरे का धड़ लगाया दिया. साथ ही वचन दिया कि यह मंदिर दक्षेश्वर महादेव मंदिर के नाम से प्रसिद्ध होगा. और वे स्वयं पूरे श्रावण मास में यहां विराजमान होकर भक्तों को दर्शन देंगे. तभी से मान्यता है कि श्रावण मास में भगवान भोलेनाथ अपनी ससुराल में स्वयं विराजमान रहते हैं.
भगवान शिव के साथ पूजे जाते हैं राजा दक्ष
भारतवर्ष में एकमात्र मंदिर ऐसा होगा. जहां भोलेनाथ के साथ राजा दक्ष को भी पूजा जाता है. मंदिर के निर्माण को लेकर भी कई तरह की मान्यता है. 1810 में रानी धनकौर ने करवाया था. 1962 में इसका पुनर्निर्माण किया गया.गंगा तट पर स्थित दक्षेश्वर महादेव मंदिर में श्रवण मॉस में शिवभक्तों का हुजूम उमड़ता है. हर कोई श्रावण के महीने में भगवान् भोले नाथ का जलाभिषेक कर उन्हें खुश कर अपनी मन्नत पूरी करने की प्रार्थना करता है. तो इस सावन में अगर आप भी भगवान् भोलेनाथ को खुस करना चाहते है तो चले आइये हरिद्वार.
