बेगलुरु। मंगलवार की देर रात कर्नाटक हाई कोर्ट में हुई सुनवाई के बाद अदालत ने धारवाड़ नगर आयुक्त के उस आदेश को बरकरार रखा है। जिसमें हुबली ईदगाह मैदान में गणेशोत्सव आयोजित करने की अनुमति दी थी। न्यायमूर्ति अशोक एस किनागी ने बहस के बाद अदालत का फैसला सुनाते हुए कहा कि यह संपत्ति धारवाड़ नगरपालिका की है। अंजुमन-ए-इस्लाम 999 साल की अवधि के लिए एक रुपये प्रति वर्ष के शुल्क पर केवल पट्टा धारक था। नगर आयुक्त के आदेश को अंजुमन-ए-इस्लाम ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। हुबली.धारवाड़ निगम ने ईदगाह मैदान में गणेश प्रतिमा स्थापित करने की अनुमति दी थी। निर्णय निर्वाचित प्रतिनिधियों और अधिकारियों के साथ लंबी बैठक के बाद सोमवार देर रात लिया गया था। अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि यह संपत्ति प्रतिवादी की है और इसका उपयोग नियमित गतिविधियों के लिए किया जाता रहा है। इससे पहले मंगलवार को ही दिन में देश की शीर्ष अदालत सुप्रीम कोर्ट ने बेंगलुरु के ईदगाह मैदान में गणेश चतुर्थी उत्सव की अनुमति देने से मना कर दिया और दोनों पक्षों को यथास्थिति बनाए रखने का भी आदेश दिया था। शीर्ष अदालत ने कहा था कि गणेश चतुर्थी की पूजा कहीं और भी की जा सकती है।
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जस्टिस इंदिरा बनर्जी, जस्टिस एएस ओका और जस्टिस एमएम सुंद्रेश की पीठ ने कहा था कि हाईकोर्ट की एकल पीठ के समक्ष याचिका लंबित है और सुनवाई की तिथि 23 सितंबर निर्धारित की गई है। इससे जुडे़ सभी प्रकार के सवाल और मुद्दे हाईकोर्ट में उठाए जा सकते हैं। इस बीच दोनों पक्ष यथास्थिति बनाए रखें। इस मामले पर अपने नियमित समय के बाद करीब दो घंटे तक अदालत में सुनवाई हुई। मामले पर जस्टिस हेमंत गुप्ता और जस्टिस सुधांशु धूलिया के बीच मतभिन्नता के कारण प्रधान न्यायाधीश यूयू ललित ने मामला जस्टिस बनर्जी की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ को स्थानांतरित कर दिया था। सुनवाई के दौरान कर्नाटक वक्फ बोर्ड ने कहा अदालत में कहा कि पिछले 200 साल में ईदगाह मैदान पर ऐसे धार्मिक उत्सवों का आयोजन कभी नहीं हुआ है। इस मामले में बड़ा सवाल है कि मैदान किसका है। राज्य सरकार का या वक्फ बोर्ड का। कर्नाटक सरकार की ओर से पेश सालिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि इस मैदान पर मालिकाना हक केवल राज्य सरकार का रहा है।
