ज्ञानवापी मस्जिद परिसर मामले में आज एक बड़ी खबर सामने आयी है, वाराणसी सिविल कोर्ट ने एडवोकेट कमिश्नर अजय मिश्रा जिनकी निगरानी में ही पूरा सर्वे हुआ है उन्हें कमीशन से हटा दिया है और सर्वे कार्य की रिपोर्ट दाखिल करने की ज़िम्मेदारी अब सर्वे टीम में सहयोगी कोर्ट कमीशनर की भूमिका निभा रहे विशाल सिंह को मिली है, रिपोर्ट बनाने में उनकी मदद एक और कोर्ट कमिश्नर अजय सिंह करेंगे।
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अदालत ने एडवोकेट कमिश्नर अजय मिश्रा को हटाने का फैसला विशाल सिंह की शिकायत पर ही दिया है, विशाल सिंह अदालत में लिखित शिकायत दर्ज की थी कि सर्वे से जुड़ी सूचनाएं मीडिया में अजय मिश्रा द्वारा रखे गए प्राइवेट वीडियोग्राफर आर पी सिंह लीक कर रहे थे. अदालत ने विशाल सिंह की शिकायत को सही माना और इतना बड़ा फैसला लिया। बता दें कि मुस्लिम पक्ष शुरू से ही अजय मिश्रा को कोर्ट कमीशनर नियुक्त किये जाने का विरोध कर रहा था और अदालत में अपील भी दायर की थी जिसे इस अदालत ने ख़ारिज कर दिया था.
अदालत ने इसके अलावा आज वुजूख़ाने के तालाब की दीवारों को तोड़ने और कथित शिवलिंग की माप करवाने के लिए दायर याचिकाओं पर मुस्लिम पक्ष को अपनी आपत्ति दाखिल करने के लिए 18 मई तक का समय दिया है. इन याचिकाओं और मुस्लिम पक्ष की आपत्ति पर अब कल सुनवाई की जाएगी। कोर्ट ने कमीशन द्वारा रिपोर्ट दाखिल करने के लिए मांगी गयी मोहलत की बात स्वीकार कर ली है. कोर्ट ने अब कमीशन को 19 को सर्वे रिपोर्ट दाखिल करने को कहा गया.
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इस मामले में अब ज़िम्मेदार बनाये गए कोर्ट कमीशनर विशाल सिंह ने कहा कि 14 से 16 मई तक ज्ञानव्यापी मस्जिद परिसर में हुए सर्वे उनकी अध्यक्षता में ही हुआ है और अब वह ही रिपोर्ट माननीय अदालत में रिपोर्ट पेश करेंगे। मगर सवाल यही उठा रहा है कि अजय मिश्रा को हटाए जाने के बाद सर्वे रिपोर्ट पर कितना भरोसे लायक होगी, भले ही विशाल सिंह यह दावा कर रहे हैं कि सर्वे उनकी अध्यक्षता में हुआ मगर वह सर्वे टीम का हिस्सा तो थे ही.
