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गुजरात naroda Gam Riot मामले में सभी 68 आरोपियों को अदालत ने किया दोषमुक्त

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अहमदाबाद। नरोदा गाम दंगा मामले में आज गुरुवार को फैसला आया। एसआईटी मामलों के विशेष जज एसके बक्शी की अदालत 68 आरोपियों को दोषमुक्त करार दिया है। बरी होने वालों में गुजरात की पूर्व मंत्री और भाजपा नेता माया कोडनानी और बजरंग दल के नेता बाबू बजरंगी भी शामिल हैं।

गुजरात के नरोदा गाम दंगा मामले में अहमदाबाद की कोर्ट ने आज फैसला सुनाया है। अदालत ने 68 आरोपियों को बरी कर दिया है। गुजरात की पूर्व मंत्री और भाजपा नेता माया कोडनानी और बजरंग दल के नेता बाबू बजरंगी आरोपियों में शामिल थे, जिनको बरी किया है। कोडनानी गुजरात की नरेंद्र मोदी सरकार में राज्य की महिला एवं बाल विकास मंत्री रह चुकी हैं।

नरोदा गाम दंगा मामले में अभी तक क्या

बचाव पक्ष के वकील ने बताया कि 8 फरवरी 2002 को नरोदा गाम में कुछ हादसे हुए। जिसमें 11 लोगों की जान गई थी। कुछ घरों को जलाया गया था। कोर्ट ने 2009 में 86 आरोपियों पर चार्ज फ्रेम किया था। आज कोर्ट ने सभी आरोपियों को बरी कर दिया है।

नरोदा गाम दंगा मामला क्या है

27 फरवरी 2002 को कारसेवकों से भरी एक ट्रेन अयोध्या से लौट रही थी। जिस पर हमला कर दिया गया था। गोधरा ट्रेन कांड में 58 कारसेवकों की मौत हो गई थी। इसके एक दिन बाद अहमदाबाद शहर के नरोदा गाम इलाके में हिंसा हो गई थी। 28 फरवरी, 2002 को हुई सांप्रदायिक हिंसा में 11 लोग मारे गए थे। इस मामले में 86 आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज किया गया था। हालांकि, 86 में से अब तक 18 लोगों की मौत हो चुकी है।

भाजपा नेता माया कोडनानी और बजरंग दल के नेता बाबू बजरंगी भी 86 आरोपियों में शामिल थे, जिन पर मुकदमा चल रहा था। दंगे के बाद सरकार ने इस पूरे मामले में एसआईटी जांच के आदेश दिए थे। पूरे केस की जांच करने के बाद एसआईटी की टीम ने पूर्व मंत्री माया कोडनानी को मुख्य आरोपी बनाया था। भाजपा नेता कोडनानी पर गोधरा ट्रेन कांड में मारे गए कारसेवकों की मौत का बदला लेने के लिए नरोदा गाम में भीड़ का नेतृत्व करने और भड़काने का आरोप था। यह घटना 2002 के नौ प्रमुख सांप्रदायिक दंगों के मामलों में से एक है, जिसकी जांच सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त एसआईटी ने की थी। मामले में कोडनानी पर दंगा और हत्या के अलावा आपराधिक साजिश रचने और हत्या के प्रयास का भी आरोप लगाया गया था। हालांकि, कोडनानी अब सभी आरोपों से बरी हो गई हैं।

बतौर गवाह अदालत में पेश हुए अमित शाह

विशेष अभियोजक सुरेश शाह के मुताबिक, अभियोजन पक्ष और बचाव पक्ष ने 2010 में शुरू हुए मुकदमे के दौरान क्रमशः 187 और 57 गवाहों को पेश किया गया। 13 साल तक चले इस मामले में छह न्यायाधीश सुनवाई कर चुके हैं। सितंबर 2017 में, भाजपा के वरिष्ठ नेता केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भाजपा नेता माया कोडनानी के बचाव पक्ष के गवाह के रूप में अदालत के समक्ष पेश हुए थे। कोडनानी का दावा है कि वह हिंसा के दौरान गुजरात विधानसभा और सोला सिविल अस्पताल में मौजूद थीं न कि नरोदा गाम में जहां नरसंहार हुआ था।

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