- नवेद शिकोह
चिंगारी कोई भड़के, तो सावन उसे बुझाये
सावन जो अगन लगाये, उसे कौन बुझाये,
ये मशहूर गीत प्रासंगिक बनकर कोरोना के क़हर में यूपी के पंचायत चुनावों के फैसले पर व्यंग्य कर रहा है।
हम सबको याद है कि महामारी कानून को तोड़ने वाले अनुशसनहीन लड़के मुर्गा बनाये गए और लाठियां खाए थे। नियमों को तोड़ने वाले लाखों लोगों का चालान भी हुआ था। उन्हें आर्थिक दंड भी देना पड़ा था। ऐसे लोग अस्थाई जेल भी गए थे। कानून का पालन न करने वालों को सज़ा देने वालों को तरह-तरह की सज़ा देने वाले ही कोरोना के खतरों को नज़रअंदाज़ करें तो इन्हें कौन सज़ा देगा ?
ये एक जटिल यक्ष प्रश्न है।
इस उत्तर प्रदेश से जुड़ी दो खबरें सबसे बड़ी हैं। एक खबर ये कि इतनी बड़ी आबादी वाले इस सूबे में कोरोना ने दोबारा आतंक फैलाना शुरू कर दिया है। दूसरी खबर ये है कि यूपी में पंचायत चुनाव की तैयारियां शबाब पर हैं।
इस चुनाव में बारह करोड़ अट्ठाइस लाख लोग वोटर हैं। स्थानीय पुलिस के अतिरिक्त दूसरे सूबे से लाखों सुरक्षा बल और अन्य कर्मचारी गण इन चुनावों की व्यवस्था/सुरक्षा इंतेज़ामों के लिए जुटेंगे। इस लोकतांत्रिक उत्सव में करोड़ों मतदाता ग्रामीण क्षेत्रों के होंगे। आकड़े बताते हैं कि शहरों की अपेक्षा गांव-देहातों में अधिक लोग अशिक्षित हैं। ये कम जागरूक हैं। शहरों की बनिस्बत गांवों में सूचना तंत्र कमजोर है। कोविड से बचाव के लिए जागरुकता और सरकारी गाइड लाइन से ग्रामीण इतना वाक़िफ नहीं हैं जितना जागरुक शहरी है।
केंद्र सरकार ने भी कह दिया है कि कोरोना रिटर्न भयावह है। देश भर में इस संक्रमण के खतरे मंडरा रहे हैं। कई राज्यों में तो हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं। मृत्यु दर भी पहले कम थी, पर अब बढ़ रही है। नीति आयोग ने साफतौर पर कहा है कि इस रफ्तार बढ़ रहे संक्रमण पर क़ाबू नहीं किया गया तो स्वास्थ्य सेवाएं भी चरमरा जाएंगी।
केंद्र ने ये बात बीते बुधवार को कही। दोबारा कोरोना से हालात ख़राब होने की साफ तस्वीर मार्च से दिखाई देने लगी थी। आकड़े बताते हैं कि देश के तमाम सूबों की तरह यूपी भी कोरोना रिटर्न की चपेट मे है। लखनऊ के हालात बदतर हालत हैं। यहां हर दिन कोरोना संक्रमित मरीज़ों की संख्या दिन प्रतिदिन बढ़ रही है। पिछले 72 घंटों में लखनऊ में 1384 मामले सामने आए हैं। मार्च माह से यूपी सहित लखनऊ में करोना मरीजों की संख्या बढ़नी शुरू हुई थी, जो बदस्तूर जारी है। यूपी के तमाम जिलों की अपेक्षा लखनऊ में हालात ज्यादा खराब हैं। ये वही लखनऊ है जहां पंचायत चुनाव किए जाने का निर्णय हुआ। और कोरोना की वापसी की तस्वीरों के बीच यूपी में पंचायत चुनाव की तारीख़ों का एलान हुआ।
अब यदि कोरोना के खतरों के बीच यूपी में पंचायत चुनाव का एलान हो ही चुका है तो सरकार, प्रशासन और आम जनता/मतदाओं को बेहद एहतियात और जागरुकता बरतनी होगी। महामारी कानून का पालन करना होगा। प्रत्याशियों को अपने प्रचार में सामाजिक दूरी, मास्क और सेनेटाइजर का इस्तेमाल करना होगा। वोटर भी वोट डालते समय खुद इन एहतियातें को बरतें।
विगत दिनों पत्रकारों ने विधानभवन में संवाददाता संवाददाता समिति का चुनाव आयोजित किया था। दुर्भाग्य कि दूसरों को जागरुक करने वाला ये बुद्धिजीवी वर्ग एहतियात नहीं बरत पाया। नतीजतन करीब आठ सौ पत्रकारों की सहभागिता वाले संवाददाता समिति के अदना से चुनाव पर कोरोना ने हमला कर दिया। चुनाव में विजेता एक पत्रकार की कोरोना में मृत्यु हो गई। होली से पहले तक करीब साठ पत्रकारों की जांच में एक दर्जन पत्रकार कोरोना संक्रमित निकले। अन्य पत्रकारों की जांच का सिलसिला आज तेज़ हुआ है।
संवाददाता समिति के मामूली चुनावों को सैंपल मानकर करोड़ों की सहभागिता वाले पंचायत चुनाव के इंतेजामिया प्रशासन/सरकार, प्रत्याशियों और मतदाताओं को इससे सबक़ लेना चाहिए है।

