नौ पर्वतीय जिलो में कोरोना का तांडव, रिकार्ड मौतें

उत्तराखंडनौ पर्वतीय जिलो में कोरोना का तांडव, रिकार्ड मौतें

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नौ पर्वतीय जिलो में कोरोना का तांडव, रिकार्ड मौतें

5 मार्च 2020 से 30 अप्रैल 2021 तक हुई 312 मौतें
1 मई से 14 मई के बीच 331 कोरोना संक्रमितों की मौत

देहरादून। कोरोना की दूसरी लहर में उत्तराखंड के पर्वतीय इलाकों में कोरोना संक्रमण का प्रसार तेज होने के साथ यहां कोरोना से जान गंवाने वालों की संख्या भी चिंता पैदा कर रही है। खासकर प्रदेश के नौ पर्वतीय जिलों में कोरोना संक्रमितों के साथ कोरोना मरीजों की मौत का आंकड़ा भी बढ़ने से प्रशासन की नींद उड़ा गयी हैं। माना जा रहा है कि कोरोना संक्रमितों की संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है। अभी तक पर्वतीय इलाकों में रहने वाले लोग गंभीर स्थिति में आने के बाद ही मैदानी इलाकों में आकर कोरोना की जांच कराते हैं। अधिकतर मरीज कोरोना की जांच कराने से बच रहे हैं वरना आंकड़ें कहीं अधिक होे सकते हैं।

कोरोना संक्रमण के कोप का शिकार अब उत्तराखंड के पर्वतीय जिले भी बन रहे हैं। पर्वतीय जिलों में पौड़ी, अल्मोड़ा, पिथौरागढ, टिहरी ़ रुद्रप्रयाग, उत्तरकाशी, बागेश्वर, चमोली, चंपावत में कोरोना संक्रमण तेजी से बढ़ रहा है। वहीं इन जिलों में कोरोना से जान गंवाने वालों की संख्या भी कहीं अधिक है। आंकड़ों की बात करें तो पिछले साल 15 मार्च 2020 को उत्तराखंड में पहला कोरोना केस मिलने के बाद से 30 अप्रैल 2021 तक राज्य के नौ पहाड़ी जिलों में कोरोना से कुल 312 मौतें हुई थीं। मगर इन्हीं जिलों में 1 मई से 14 मई के बीच 331 कोरोना संक्रमितों की मौत हो गयी।

यह आंकड़ा दर्शाता है कि जानलेवा कोरोना संक्रमण उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में किस कदर फैल चुका है। पौड़ी जिले में सबसे अधिक कोरोना मरीजों की मौत हुई है। कोरोना की दूसरी लहर में पर्वतीय जिलों में मौत का ग्राफ बढ़ने से रोकने के लिये सरकार को पहाड़ों में स्वास्थ्य सुविधाओं को बढ़ाने के साथ ही कोविड जांच और मेडिकल किट देने पर ज्यादा ध्यान देना होगा। अगर पर्वतीय जिलों में कोरोना इसी रफ्तार से बढ़ता गया तो आने वाले दिनों में संक्रमण का प्रसार रोकना बेहद मुश्किल हो जायेगा। वहीं जानलेवा कोरोना देरी करने से न जाने कितनी जानें और छीन लेगा।

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