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संगमनगरी में कोरोना कोप जारी, मिले 1977 नये कोरोना संक्रमित, 1 की मौत


संगमनगरी में कोरोना कोप जारी, मिले 1977 नये कोरोना संक्रमित, 1 की मौत

48887 हो गया जिले में कोरोना संक्रमितों का आंकड़ा
कोरोना एक्टिव केस 15229, 492 ने गंवाई जान

प्रयागराज। जनपद प्रयागराज में कोरोना का कोप शनिवार को भी जारी रहा और 1977 नये कोरोना संक्रमित मिलने के साथ जिले में कोरोना संक्रमितों का आंकड़ा 48887 हो गया है। वहीं जिले में अब कोरोना एक्टिव केस 15229 हो गये हैं। आज 945 लोगों को विभिन्न अस्पतालों से डिस्चार्ज किया गया जिन्हें मिलाकर कोरोना को मात देने वालो का आंकड़ा 33166 हो गया है। वहीं आज 1 कोरोना संक्रमितों की मौत हो जाने से संक्रमण के कारण जान गंवाने वालों की संख्या 492 हो गयी है। (आंकड़ों का स्रोतः कोविड19इंडिया.ओआरजी )

आपदा में बेईमानी पर उतरे प्राइवेट लैब और एंबुलेंस संचालक

कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच लोगों को आपदा में बेईमानी पर उतरे प्राइवेट लैब और एंबुलेंस संचालकों की मनमानी का भी सामना करना पड़ रहा है। सरकार ने किसी भी प्राइवेट लैब पर आरटीपीसीआर जांच के लिए 700 रुपये रेट निर्धारित किया है। लेकिन मौके का फायदा उठाने में जुटे प्राइवेट लैब संचालक आरटीपीसीआर जांच के लिये लोगोें से 1100 से 1200 रुपये तक वसूल रहे हैं। लोग विरोध करते हैं तो उन्हें कहीं और जाकर जांच कराने की बात कह दी जाती है। मजबूरी में लोगोें को अधिक पैसे देने पड़ रहे हैं। वहीं कोरेाना संक्रमित को उपचार के लिये अस्पताल ले जाने के लिये प्राइवेट एंबुलेंस का घंटों इंतजार करना पड़ता है। दरअसल लोड अधिक होने के कारण सरकारी एंबुलेंस की उपलब्धता प्रभावित हुई है। ऐसे में प्राइवेट एंबुलेंस संचालक न केवल घंटों इंतजार करवा रहे हैं बल्कि मुंहमांगे पैसे भी वसूल रहे हैं। गंभीर मरीज को लेकर परेशान तीमारदार कुछ कहते हैं तो एंबुलेंस उन्हें छोड़कर चले जाने की धमकी देने लगता है।

बेचारे मरीज जायें तो जायें कहां

उत्तर प्रदेश में कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों को देखते हुए सीएम योगी आदित्यनाथ ने सरकारी अस्पतालों की ओपीडी बंद रखने के निर्देश दिये थे। सीएम योगी ने अधिकारियों को टेलीमेडिसिन के नंबर आम लोगों को उपलब्ध कराने के आदेश दिये थे ताकि अन्य रोगों के मरीजों को उपचार दिया जा सके। जिला प्रशासन ने ओपीडी तो बंद करा दी मगर लोगों को टेलीमेडिसिन के लिये कोई नंबर जारी नहीं किया। ऐसे में लोग उपचार के लिये भटक रहे हैं पर उन्हें राहत नहीं मिल पा रही। अब हजारों मरीज जायें भी तो जायें कहां, यह सवाल उनके सामने खड़ा है और अधिकारी बेफिक्र हैं।

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