सुनील शर्मा
देश में चुनाव की आहट के साथ ही कोरोना की आमद भी तेज हो गयी है। जैसे-जैसे चुनावी राजनीति आगे बढ़ रही है वैसे ही कोरोना भी रूप बदल कर मैदान में उतर रहा है। अब कोरोना की पार्टी में एक और मजबूत सहयोगी शामिल हुआ तो उसकी रणनीति को लेकर उससे बात करना भी शर्माजी ने जरूरी समझा। कोरोना की टीम में अंडरडाॅग की तरह शामिल हुए और सभी को चैंका रहे ओमिक्राॅन से मिलना मुश्किल तो नहीं मगर खतरनाक जरूर था। सो शर्माजी ने पहन पीपीई किट बनाये रखी सोशल डिस्टेंसिंग और शुरू कर दिया ओमिक्राॅन का इंटरव्यू।
शर्माजी का पहला सवाल, ओमिक्राॅन जी, आप हाल ही में कोरोना की पार्टी में शामिल हुए हैं, आपको कैसा महसूस हो रहा है,
ओमिक्राॅनः जी, मुझे बेहद अच्छा महसूस हो रहा है। भारत में हमारी पार्टी के आगे बढ़ने की प्रबल संभावनाएं हैं। हमारी अपनी क्षमताएं तो हैं ही साथ ही विपक्षी दलों का सहयोग भी हमें प्राप्त हो रहा है जिसके लिये हम उनके बेहद आभारी हैं।
ओमिक्राॅन का जवाब सुनकर असमंजस में पड़े शर्माजी ने पूछा, भला अन्य राजनीतिक दल आपको सहयोग क्यों करेंगे? यह कैसा राज है जरा इसका खुलासा कीजिये।
शर्माजी की बात सुनकर चेहरे पर आई कुटिल मुस्कान लिये ओमिक्राॅन बोला, अरे शर्माजी, नेताओं को जीत हासिल करने के लिये क्या चाहिये? भीड़ ही न। और हमें आगे बढ़ने के लिये भी वही भीड़ ही तो चाहिये। अब देखिये हमारी पार्टी के वरिष्ठ नेता कोविड-19 को हराने के लिये सरकार ने लोगों को घरों में बंद कर दिया। मास्क पहनवा दिये, सामाजिक दूरी रखवा दी। और तो और बार-बार हाथ धुलवा कर हमारे वरिष्ठ नेता का हाल मरणासन्न कर दिया। वो तो भला हो लोगों का जिन्होंने सरकार की बातें पूरी तरह से न मानी वरना हमारा तो अस्तित्व ही खत्म होने वाला था। अब चुनावी मौसम आते ही हमने फिर से अपनी पार्टी को खड़ा किया है। हमारे वरिष्ठ नेता कोविड-19 तो भाई डेल्टा के साथ लोगों को अपने पाले में खींच ही रहे हैं और मैं भी धीरे-धीरे करके अपने पैर जमा रहा हूं। देश की जनता और नेताओं ने चाहा तो जल्द ही देश पर हमारा राज होगा।
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ओमिक्राॅन की बातों से घबराए शर्माजी बोले, आखिर चुनावी मौसम आते ही आप मौसमी पार्टियों की तरह उछल-कूद क्यों मचा रहे हैं? क्या कोरोना पार्टी का चुनाव में उतरने का इरादा है?
शर्माजी के सवाल पर ओमिक्राॅन ने कहा, शर्माजी, ये पार्टियां तो पांच राज्यों में ही चुनाव लड़ कर जीत हासिल करने का प्रयास कर रही हैं। मगर हमारी पार्टी तो इन पांच राज्यों से शुरूआत कर पूरे देश पर कब्जा करने जा रही है। अब कौन सा राजनीतिक दल किस राज्य के चुनाव में जीत हासिल करेगा यह तो पता नहीं मगर हमारी जीत तो सुनिश्चित है। हम लड़ेंगे, हम जीतेंगे, खेला होबै…
अब शर्माजी के धैर्य का बांध टूट गया, उतार पीपीई किट बोले, आप अपनी जीत के प्रति इतने आश्वस्त क्यों हैं? क्या पहले की तरह आप हार नहीं जाओगे?
इस पर ओमिक्राॅन ठहाके मार कर हंसने लगा और बोला, हारेंगे कैसे शर्माजी, इस बार तो क्या जनता, क्या सरकार और क्या विपक्ष सभी तो हमारे साथ हैं। चुनावी सभाओं में जाने वाली भीड़ नारे चाहे किसी के भी लगाये मगर अपने तन-मन में सिर्फ हमीं को बसा कर ले जाती है। हमारा खूब प्रचार-प्रसार कर रही है इस बार देश की जनता। अरे पिछली बार तो सरकार ने सब बंद करा दिया, विपक्ष के नेता भी घरों में घुस कर बैठ गये वरना लीड तो हम पहली बारी में भी ले ही लेते। मगर इस बार तो खुद सरकार ही जनता को अपने घरों से बाहर निकाल रही है। सरकार पर अंगुली उठाने वाले विपक्षी दल भी लोगों की भीड़ के साथ फोटो खिंचवा कर बेहद खुश हो रहे हैं। और शर्माजी आपको अंदर की बात बताता हूं। हमारा और नेताओं का अंदरूनी समझौता हो चुका है। वह हमारे लिये भीड़ जुटा रहे हैं और हम उनके लिये मुद्दा और मौका…
ओमिक्राॅन की बातों से चकराये शर्माजी ने पूछा, नेताओं से कैसा समझौता, कैसा मुद्दा और मौका, मैं कुछ समझा नहीं।
इस पर ओमिक्राॅन बोला, समझोगे कैसे शर्माजी, हो तो आप भी इसी देश की जनता ही न। अरे भाई जब चुनावी रैलियों में भीड़ आयेगी तभी तो हमें कुछ कर दिखाने का मौका मिलेगा। और जब हमारी कोरोना पार्टी अपने जलवे दिखायेगी तो विपक्षी दलों को सरकार पर निशाना साधने का मौका मिलेगा। आपने देखा नहीं, पिछली बार जब हमारा वर्चस्व था तो उसी की कमाई आज तक खा रहे हैं विपक्ष के नेता। बार-बार गंगा में बहती लाशें, आॅक्सीजन-दवाओं की कमी का जिक्र कर लोगों की भावनाओं को भड़का रहे हैं या यूं कहें कि अपने लिये वोट जुटा रहे हैं। अब फिर से हमें अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका देकर वह अपने लिये मुद्दा और मौका तो हासिल कर ही रहे हैं न…
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अब शर्माजी का सवाल था, यह तो बात विपक्षी पार्टियों की हुई मगर सरकार को क्या फायदा होगा?
अरे भाई, जब दुल्हा ही नहीं आयेगा तो स्वागत-सत्कार की तैयारियां तो बेकार ही जायेंगी न, ओमिक्राॅन बोला। शर्माजी, सरकार ने कोरोना से बचाने के लिये अस्पताल बनवाये, क्सीजन प्लांट लगवाये, वैक्सीन तैयार करवाईं, अब अगर हम ही नहीं आये तो इतनी व्यवस्था तो बेकार चली जायेगी न। अरे देश की जनता को पता कैसे चलेगा की सरकार ने कोरोना के इलाज के लिये कितनी तैयारी की हैं। जनता के लिये कितना सोचती है सरकार। वो बात अलग है कि सरकार की तैयारियां कोरोना से संक्रमित होने के बाद इलाज करने के लिये है कोरोना से बचाने के लिये नहीं।
तो शर्माजी, इतनी गहराईयों में न जाइये और अपने घर में सुरक्षित होकर बैठिये। अभी तो हमने शुरूआत की है। यदि राजनीतिक पार्टियों और कोरोना की दूसरी लहर का दंश झेलने के बाद भी राजनीतिक सभाओं में उमड़ रही देश की साहसिक जनता का सहयोग रहा तो हम एक बार फिर अपना परचम लहरायेंगे। फिर लाशों के ढेर लगेंगे, श्मशानों में लंबी लाइनें लगेंगी। अस्पतालों के काम चलेंगे, मेडिकल स्टोर, परचून वाले मालामाल हो जायेंगे। बेड और ऑक्सीजन के लिये गिड़गिड़ाते लोग फिर दिखेंगे। फिर से मजदूर अपने घरों को पलायन करेंगे और उनकी फोटो सोशल मीडिया पर पोस्ट कर नेता लोग राजनीति करेंगे। शर्माजी आप देखना, जनता के आशीर्वाद और नेताओं के सहयोेग से हम जरूर कामयाब होंगे….

