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भागवत के बयान पर बखेड़ा

bhagwat

अमित बिश्नोई
पिछले कुछ समय से मस्जिद या दरगाहों के नीचे या परिसर में मंदिरों के खोज की ख़बरें बढ़ गयी हैं और जैसे ही ऐसी कोई खबर आती है, कोई याचिका किसी लोअर कोर्ट में दाखिल होती है और फिर उसपर कोर्ट द्वारा तुरंत सर्वे जैसी कार्रवाई का आदेश दे दिया जाता है. इस तरह की बढ़ती घटनाओं को लेकर आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत पहले भी अपने बयान दे चुके हैं लेकिन पिछले दिनों उन्होंने इन घटनाओं पर अपनी चिंता भी जताई और कड़ी टिप्पणी भी की। उनकी टिप्पणी ऐसी थी कि उसपर बखेड़ा खड़ा होना अनिवार्य जैसा हो गया था. भागवत ने खास तौर उन स्वयंभू हिंदू नेताओं पर अपनी भड़ास निकाली जो इस तरह के कामों में लिप्त हैं, भागवत ने सख्त लहजे में इस तरह के हिंदू-मुस्लिम विवाद पैदा करने से इन लोगों को बाज़ आने के लिए कहा. भागवत ने कहा कि हमें अब ऐसा कोई विवाद नहीं खड़ा करना चाहिए जिससे हमारी इस परंपरा को धक्का पहुंचे. ज़ाहिर सी बात है संघ प्रमुख के इस बयान से हिन्दू संगठनों में खलबली मचना स्वाभाविक था. भागवत के इस बयान के बाद हिन्दू संतों जिसमें जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य और उत्तराखंड के ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद शामिल हैं ने मोर्चा खोल दिया।

दरअसल भागवत ने पुणे में आयोजित एक कार्यक्रम में नये-नये हिंदू नेताओं की इस उग्रता पर चिंता जताते हुए कहा कि इससे देश की बदनामी हो रही है। भागवत की चिंता इस बात पर भी है कि इस तरह के मामलों में पुलिस प्रशासन पूरी तरह से उदासीन बना रहता है और फिर संभल जैसी घटनाएं होती हैं. भागवत पहले भी कहा चुके हैं कि राम मंदिर की बात अलग थी, काशी और मथुरा का मामला अदालत में है, उसपर अदालत तथ्यों के आधार पर फैसला करेगी लेकिन हर मस्जिद और दरगाह में मूर्तियां ढूंढना सही नहीं है. भागवत ने कहा कि हमें साबित करना होगा कि हम मिलकर रह सकते हैं, दुनिया में हिंदुओं को अपनी सद्भावना वाली अक्षुण्ण छवि बनाये रखनी है और इसलिए यह आवश्यक है कि वे संयम बरतें। उन्होंने ये भी कहा कि हमें अब ऐसा कोई विवाद नहीं खड़ा होना चाहिए जिससे देश की परंपरा को धक्का पहुंचे. भागवत ने अपने व्याख्यान में जहाँ औरंगज़ेब की आलोचना की वहीँ गौकशी पर रोक लगाने के लिए बहादुरशाह ज़फर की तारीफ़ भी की. भागवत ने कहा कि यहां कभी किसी को पराया नहीं समझा जाता रहा और यही हिंदुओं की विशेषता है. भागवत का ये भाषण अब विवाद का विषय बन गया है. लोग कह रहे हैं कि हिंदूवादी नेता होते हुए भी वे कैसे ऐसा बयान दे सकते हैं?लेकिन अगर गहराई से हिंदू परंपरा के इतिहास को समझा जाए तो पता चलता है कि हिंदू समाज ने कभी भी किसी गैर-धर्मी के साथ कोई भेद-भाव नहीं किया. इसीलिए भागवत ने हिंदू धर्म की परंपरा कायम रखने की बात कही.

भागवत ने आगे कहा कि आजकल रोज-रोज कोई नया विवाद सामने लाया जा रहा है, जो सही नहीं है. कुछ लोग सोचते हैं कि ऐसे विवाद खड़े करके वो हिंदुओं के नेता बन जाएंगे तो यह सरासर गलत है. उन्होंने कहा कि इसी तरह की कट्टरता औरंगज़ेब के शासनकाल में भी थी. धर्म के नाम पर जो भी उत्पीड़न और अत्याचार हुए हैं वे धर्म की समझ की कमी के कारण हुए हैं। धर्म की गलत समझ के कारण दुनिया में अत्याचार हुए हैं। धर्म की सही व्याख्या करने वाला समाज होना जरूरी है। भागवत धर्म को सही तरीके से पढ़ाये जाने की बात भी करते हैं और कहते हैं कि धर्म को समझना होगा, अगर इसे ठीक से नहीं समझा गया तो धर्म का अधूरा ज्ञान अधर्म की ओर ले जाएगा। भागवत अधूरे ज्ञान की बात को और स्पष्ट करते हुए कहते हैं कि धर्म के नाम पर दुनिया भर में जितने भी उत्पीड़न और अत्याचार हुए हैं धर्म के प्रति समझ की कमी के कारण हुए हैं। संघ प्रमुख बताते हैं कि सब कुछ धर्म के अनुसार ही चलता है और इसीलिए इसे “सनातन” कहा जाता है। वो धर्म के आचरण को समझाते हुए कहते हैं कि धर्म का आचरण ही धर्म की रक्षा है। इस सबके साथ भागवत ये भी कहते हैं कि यह स्वीकार्य नहीं है.

संघ प्रमुख के इस बयान से सबसे बड़ा झटका कांग्रेस पार्टी को लगा है क्योंकि खड़गे हों, राहुल हों या फिर पार्टी के और भी नेता, उनके निशाने पर हमेशा मोहन भागवत ही रहते हैं लेकिन अब जबकि इतने जटिल विषय पर संघ प्रमुख खुलकर मस्जिदों और दरगाहों में मूर्तियां ढूंढने वालों को नसीहत दे रहे हैं और लोगों से कह रहे हैं कि ये सब बंद होना चाहिए तो कांग्रेस पार्टी भी अब सोचने पर मजबूर है कि इस मुद्दे पर वो क्या बोले, यही वजह है कि कांग्रेस पार्टी की तरफ से अभी तक भागवत के बयानों पर ख़ामोशी छाई हुई है. वहीँ हिन्दू संतों ने भागवत के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. उनका कहना है कि भागवत अपनी सुविधा के अनुसार बयान देते हैं. उन्हें जब हिन्दू वोटों की ज़रुरत होती है तब वो मंदिरों की बातें करने लगते हैं और अब जब चुनाव हो चुके हैं तो वो कहते हैं हम अपने मंदिरों की तलाश न करें। जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य हों या फिर ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद, दोनों ने जिस तरह संघ प्रमुख को आड़े हाथों लिया है, उससे तो लगता है कि विवाद और बढ़ेगा और भागवत के बयानों से उठा यह बखेड़ा जल्द ठंडा नहीं होने वाला।

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