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Hate Speech Case : जितेंद्र नारायण सिंह त्यागी और महंत यति नरसिंहानंद सरस्वती के बीच खिंची लकीर, जेल से रिहा हो बिना मिले निकले जितेंद्र

गाजियाबाद। डासना स्थित देवी मंदिर के महंत यति नरसिंहानंद सरस्वती महाराज के साथी जितेंद्र नारायण सिंह त्यागी जिस बेसब्री से यती नरसिंहानंद सरस्वती महाराज से मिले थे। आज दोनों ही एक दूसरे के बीच खाई बनी हुई दिखाई दी। जब जितेंद्र नारायण सिंह त्यागी जेल से रिहा होने के बाद यती नरसिंहानंद सरस्वती महाराज और उनके अन्य साथियों से बगैर मिले ही निकल गए। इस बात से आहत होकर यति नरसिंहानंद सरस्वती ने अपने दूसरे अध्याय की शुरुआत कर दी है। जिसके तहत उन्होंने अभी तक इस्लाम के जिहाद से लड़ाई लड़ने की खुद गलती मानी है और अपना आगे का जीवन मां जगत जननी और महादेव के यज्ञ में ही बिताए जाने की घोषणा की है।

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गाजियाबाद के डासना स्थित देवी मंदिर के महंत यति नरसिंहानंद सरस्वती महाराज जो कि किसी बात को लेकर हमेशा सुर्खियों में बने रहते हैं। इस बार यती नरसिंहानंद सरस्वती ने जो बयान जारी किया है। उसमें कहा गया है कि अभी तक उन्होंने इस्लाम के जिहाद से लड़ने में अपना समय लगाया और तमाम तरह की परेशानियों को झेला। लेकिन अब वह अपने जीवन का आगे का नया अध्याय शुरू कर रहे हैं। यानी वह आने वाला आगे का जीवन मां जगत जननी और महादेव के यज्ञ में ही व्यतीत करेंगे। यानी सार्वजनिक जीवन से उनका कोई वास्ता नहीं रहेगा।

आज जितेंद्र नारायण सिंह त्यागी जेल से रिहा हो गए हैं। इस दौरान यति नरसिंहानंद सरस्वती महाराज और उनके अन्य तमाम साथी जितेंद्र नारायण सिंह त्यागी से मिलने गए थे। लेकिन जितेंद्र नारायण सिंह त्यागी रिहा होते ही उनसे मिले बगैर ही चले गए। इस बात से यति नरसिंहानंद सरस्वती महाराज बेहद आहत भी हैं। उन्होंने कहा कि वह हरिद्वार में केवल और केवल जितेंद्र नारायण सिंह त्यागी के कारण यानी उनकी रिहाई के लिए आए थे।

जितेंद्र नारायण सिंह त्यागी का इस दौरान किस तरह का उनके साथ अनुभव रहा। यह तो वही जान सकते हैं।  लेकिन आज वह यह जरूर कहना चाहते हैं कि जितेंद्र नारायण सिंह त्यागी को यदि जेल जाना पड़ा तो उनकी कमजोरी के कारण जाना पड़ा। इस बात के लिए वह खुद अपने आप को दोषी मान रहे हैं और इस बात के लिए जितेंद्र नारायण सिंह से वह क्षमा प्रार्थी भी हैं।

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इतना ही नहीं यती नरसिंहानंद सरस्वती महाराज ने कहा है। कि वह यह घोषणा करते हैं कि अभी तक उन्होंने जो भी किया। उन सभी गलतियों के लिए वह क्षमा मांगते हैं और अब वह अपना आगे का जीवन एकदम साधारण व्यतीत करेंगे।

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