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Congress करेगी बुजुर्गों पर ही भरोसा, 65 पार सेवानिवृत्त का प्रस्ताव 2024 तक टला

नई दिल्ली। उदयपुर में तीन दिवसीय राष्ट्रीय चिंतन शिविर में कांग्रेस ने कई बड़े फैसले किए थे। जिनमें से एक फैसला युवा नेतृत्व को आगे लाने और आगामी चुनाव में अधिक से अधिक टिकट देने का भी था। लेकिन चिंतन शिविर में किए गए फैसले राजस्थान की सीमा से बाहर निकलते ही बदले जाने लगे हैं। कांग्रेस नेताओं के लिए अब सेवानिवृत्त का प्रस्ताव फिलहाल 2024 तक के लिए टाल दिया गया है। यानी 2024 के आम चुनाव तक पार्टी कोई जोखिम लेने के मूड में नहीं है। 

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पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष और पूर्व युवा कांग्रेस प्रमुख अमरिंदर सिंह की अध्यक्षता वाली कांग्रेस युवा समिति द्वारा पार्टी नेताओं के लिए सेवानिवृत्ति की आयु के रूप में 65 वर्ष की सिफारिश की थी। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार आज कांग्रेस कार्य समिति ने फैसला किया कि अभी इसको लागू ना किया जाए और 2024 के लोकसभा चुनाव तक के लिए टाल दिया जाए। कांग्रेस का मानना है कि अभी पार्टी को अनुभवी नेताओं की जरूरत है। ऐसे में ऐसा कोई फैसला लेना जल्दबाजी होगा।  बता दें कि युवा समिति ने 65 वर्ष की आयु में कांग्रेसियों के सेवानिवृत्त करने की सिफारिश की थी। हालांकि इस फैसले पर सोनिया गांधी ने अपनी सहमति तो व्यक्त की है। लेकिन इसको अभी दो साल तक के लिए टाल दिया गया है। 

बता दें कि उदयपुर में नौ साल के बाद कांग्रेस के तीन दिवसीय चिंतन शिविर का आयोजन हुआ था। जिसका समापन दो दिन पहले रविवार को हुआ था। इस चिंतन शिविर में देश भर से करीब 430 कांग्रेसी नेताओं ने भाग लिया था। कांग्रेस के इस चिंतन शिविर में दो दिन की मैराथन बैठक के बाद पार्टी ने कांग्रेस की कार्यकारी अध्यक्ष सोनिया गांधी के लिए छह प्रस्ताव तैयार कर सौंपा था। 

चिंतन शिविर में बैठक के लिए पार्टी की कार्यकारी अध्यक्ष सोनिया गांधी ने छह अलग-अलग समितियों का गठन किया। जिनकी सिफारिशों को शीर्ष नेतृत्व ने में मंजूरी दी थी। इसमें कई बड़े फैसले लिए गए थे। लेकिन उस चिंतन शिविर में लिया गया एक अहम फैसला पार्टी कार्यकारी अध्यक्ष ने टाल दिया। हालांकि पार्टी कार्यकारी अध्यक्ष सोनिया गांधी ने 65 साल की आयु सीमा की सिफारिश पर सहमति जताई थी। लेकिन इसका पार्टी नेताओं के बीच काफी विरोध हुआ और बताया जाता है कि इस पर जमकर हंगामा भी हुआ।

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दरअसल कांग्रेस में इस समय 65 पार नेताओं की भरमार है। जिसमें सभी दिग्गज नेता शामिल है। इनमें राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलौत,हरियाणा में भूपिंदर सिंह हुड्डा, मप्र से कमलनाथ और दिग्विजय सिंह,हिमाचल से प्रतिभा वीरभद्र सिंह के अलावा पी. चिदंबरम,आनंद शर्मा,गुलाम नबी आजाद, मल्लिकार्जुन खड़गे इत्यादी आते हैं। यहां तक ​​कि खुद कार्यकारी अध्यक्ष सोनिया गांधी भी इसी श्रेणी में आती हैं। सूत्रों की माने तो कार्यकारी अध्यक्ष सोनिया गांधी ने कहा कि  सेवानिवृत्त के इस फैसले का अभी पार्टी के भीतर बुरा प्रभाव पड़ेगा। इस कारण से इस फैसले को अभी 2024 तक के लिए टाल दिया गया।

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