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शंकराचार्यों के पीछे खड़ी कांग्रेस

congress party

अमित बिश्नोई
कांग्रेस पार्टी ने जब अयोध्या में 22 जनवरी को हो रहे राम मंदिर समारोह का निमंत्रण ठुकराया तो सभी ने यही कहा कि उसने अपने पैर में कुल्हाड़ी मार ली है, ये अलग बात है कि ऐसा कहने वालों में भगवा ब्रिगेड के लोग ही शामिल थे. इस घोषणा के आते ही दो दिनों तक भाजपा नेताओं और आई टी सेल ने एक तरह से कांग्रेस के खिलाफ मोर्चा ही खोल दिया। भाजपा का टॉप नेतृत्व सीधे नहीं बोल रहा था लेकिन खुश बहुत था. कांग्रेस पार्टी में भी इस निर्णय को लेकर काफी दुविधा थी बल्कि कुछ नेताओं ने मुखर होकर इस फैसले को गलत बताया जिसमें गुजरात और यूपी के कुछ नेताओं के नाम शामिल थे. कांग्रेस पार्टी ने भी इसपर चुप्पी साध ली थी। इसी दौरान ये बात सामने आ गयी कि देश के चारों शंकराचार्य अयोध्या प्राण प्रतिष्ठा समारोह में नहीं जा रहे हैं। ये बात सामने आते ही कांग्रेस ने इसे लपक लिया और बड़े ज़ोरदार ढंग से भाजपा पर हमलावर हो गयी.

12 जनवरी को कांग्रेस दफ्तर में हुई प्रेस वार्ता में पार्टी के तेवर देखने वाले थे, कल तक प्राण प्रतिष्ठा समारोह पर लिए गए अपने फैसले को लेकर बचाव की मुद्रा में नज़र आ रही देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस अचानक आक्रामक हो उठी और शकराचार्य की बातों को कोट कर भाजपा से सवाल पूछने लगी. कांग्रेस कहने लगी कि भाजपा ने देश के चारों महाज्ञानियों का अपमान किया है। भाजपा भगवान और भक्तों के बीच बिचौलिया बनकर खड़ी है, भाजपा कौन होती है ये तय करने वाली कि कौन किस दिन अयोध्या जाय. भाजपा होती कौन है इस तरह के निर्देश देने वाली। पवन खेड़ा ने कहा कि मुझे भगवान और मेरे बीच कोई बिचौलिया मंज़ूर नहीं। कांग्रेस अयोध्या न जाने के अपने फैसले को सही साबित करने लगी, उसने कहा कि जिस तरह शंकराचार्य इस कार्यक्रम में नहीं जा रहे हैं क्योंकि ये आयोजन विधि विधान और शास्त्रों के अनुरूप नहीं हो रहा है, हम भी उनके फैसले पर चल रहे हैं और जिन्हें निमंत्रण मिला है उन्होंने न जाने का फैसला किया।

कांग्रेस ने इसके साथ ही इस बात को भी स्पष्ट कर दिया कि कांग्रेस पार्टी में किसी को भी अयोध्या जाने के लिए मनाही नहीं है, कोई भी अगर जाना चाहे तो जा सकता है, पार्टी ने किसी को रोका नहीं है बल्कि 15 जनवरी को पूरी UPCC के पदाधिकारी अयोध्या जा रहे हैं. यूपी कांग्रेस से वीडियो जारी होने लगे कि राम लला ने हमें 15 जनवरी को बुलाया है. शंकराचार्यों के बयान से मानो कांग्रेस को संजीवनी मिल गयी. अयोध्या न जाने के फैसले पर जो कांग्रेस छुपी हुई थी वो सामने आकर ताल ठोंकने लगी.

अब पीछे हटने की बारी भाजपा की थी, कांग्रेस से तो वो आसानी से निपट लेती लेकिन देश चारों शंकराचार्यों से निपटना उसके लिए बड़ा घातक हो सकता है इसलिए ऊपर से नीचे तक निर्देश जारी हो गए कि इस मुद्दे पर अब कोई मुंह नहीं खोलेगा। इस बीच भाजपा ने दो पत्र भी दिखाए कि 22 जनवरी के कार्यक्रम को शंकराचार्यों का समर्थन प्राप्त है, कांग्रेस ने इन पत्रों को भाजपा आईटी सेल की कारस्तानी बताया क्योंकि इन पत्रों में शकराचार्यों के हस्ताक्षर नहीं थे. उधर चम्पत राय का ये बयान कि प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम में शकराचार्यों की आवश्यकता नहीं है, आग में घी डालने का काम किया। चम्पतराय का कहना था कि राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा और पूजा अर्चना का अधिकार रामानंद समुदाय को है. चम्पतराय के इस बयान पर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानन्द ने कहा कि अगर ऐसा तो फिर ट्रस्ट को रामानंद समुदाय के संतों को सौंपा जाय और वो भी प्राण प्रतिष्ठा से पहले, चम्पत राय का वहां पर क्या काम है. शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानन्द ने साफ़ तौर पर बताया कि चारों पीठों ने अयोध्या न जाने का फैसला क्यों किया है. अब कांग्रेस भी इसी फैसले की आड़ लेकर भाजपा पर आक्रामक हो उठी है और सवाल पूछ रही है कि शंकराचार्यों का अपमान क्यों? अगर धार्मिक आयोजन है तो फिर चारों शंकराचार्यों का अयोध्या जाने से इंकार क्यों? फिलहाल इस बात का कोई भी जवाब अभी सामने नहीं आया, और प्रधानमंत्री मोदी जी व्रत काल में हैं.

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