बसपा प्रमुख मायावती ने उठाये कांग्रेस की नीयत पर सवाल- कहा, राजस्थान में महिला व दलित उत्पीड़न पर कांग्रेस खामोश क्यों
सुनील शर्मा
न्यूज डेस्क। हाथरस प्रकरण में विपक्षी राजनीतिक दल प्रदेश की योगी सरकार को घेरने का कोई भी मौका नहीं छोड़ रहे हैं। धरना-प्रदर्शन से लेकर सोशल मीडिया पर भी सरकार के खिलाफ आवाज उठाने में कोई कसर नहीं छोड़ी जा रही है। मगर बसपा प्रमुख मायावती के बयानों से प्रदेश सरकार को जरूर राहत मिली होगी।
आज मायावती ने ट्वीट कर कांग्रेस की राजस्थान में महिला व दलित उत्पीड़न पर खामोशी पर सवाल उठाये हैं। उन्होंने कांग्रेस पर यूपी में वोट की राजनीति करने का आरोप भी लगाया। हालांकि उन्होंने यूपी सरकार को क्लीनचीट तो नहीं दी मगर उनका मुख्य निशाना कांग्रेस ही रही है।
बसपा सुप्रीमो मायावती ने रविवार सुबह ट्वीट कर कहा कि यूपी की तरह राजस्थान प्रदेश में भी कांग्रेसी राज में वहां हर प्रकार के अपराध व उनमें खासकर निर्दोषों की हत्याए दलित एवं महिलाओं का उत्पीड़न आदि चरम सीमा पर है, अर्थात् यहां भी कानून का नहीं बल्कि जंगलराज चल रहा है। अति-शर्मनाक व अति-चिन्ताजनक।मायावती ने आगे लिखा कि लेकिन यहां कांग्रेसी नेता अपनी सरकार पर शिकंजा कसने की बजाए खामोश हैं। इससे यह लगता है कि यूपी में अभी तक जिन भी पीड़ितों से ये मिले हैं तो यह केवल इनकी वोट की राजनीति है व कुछ भी नहीं।
जनता ऐसी ड्रामेबाजियों से सर्तक रहे।बसपा सुप्रीमो के बयान से योगी सरकार को महिला व दलित उत्पीड़न के मामलों मेें घेरने का प्रयास कर रही कांग्रेस को झटका जरूर लगा है। क्योंकि राहुल-प्रियंका के नेतृत्व में कांग्रेस ने पूरे प्रदेश में योगी सरकार के खिलाफ आंदोलन छेड़ दिया था।
प्रदेश की योगी सरकार को महिला उत्पीड़न के प्रति असंवेेदनशील साबित करने का प्रयास हर स्तर पर किया गया। मगर बसपा प्रमुख मायावती के ट्वीट के जवाब में कांग्रेस की ओर से कोई बयान जारी नहीं किया गया। हाथरस प्रकरण में दलितों को एकजुट करने और भाजपा के स्वर्ण वोट बैंक में सेंध लगाने के प्रयास में जुटी कांग्रेस को मायावती के सवालों का जवाब देने में निःसंदेह परेशानी हो रही होगी।बसपा और कांग्रेस के बीच बढ़ती जा रहीं हैं दूरियां बहुजन समाजवादी पार्टी और कांग्रेस अनेक मुद्दों पर आमने-सामने आ चुके हैं।
खासकर बसपा प्रमुख मायावती ने अनेक प्रकरणों में कांग्रेस की नीतियों और नीयत पर सवाल उठाये हैं। ऐसे में पूर्व की भांति भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ महागठबंधन बनाने के प्रयासों को भी पलीता लगता दिखाई दे रहा है। गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश के दलित वोट बैंक पर प्रत्येक राजनीतिक दल की निगाह है। दलितों के हर मुद्दे को राजनीतिक दल प्रमुखता से उठाकर खुद को उनका मसीहा साबित करने का प्रयास करते हैं। यही कारण है कि हाथरस प्रकरण में भी राजनीतिक दलों ने विशेष रूचि दिखाई और इस प्रकरण को हवा देने की पुरजोर कोशिश की।
इस मुद्दे पर कांग्रेस ने प्रदेश सरकार को घेरने का हरसंभव प्रयास किया है। वहीं मुजफ्फरनगर में हुई रैली में रालोद के मंच पर सपा और कांग्रेस के नेताओं की मौजूदगी ने विपक्ष की एकजुटता दिखाने का प्रयास किया था। मगर बहुुजन समाजवादी पार्टी इन सबसे अलग होकर इस प्रकरण में योेगी सरकार पर सवाल उठाती रही। वहीं आज मायावती के ट्वीट ने बसपा और कांगे्रस के बीच की दूरियों को जाहिर कर दिया है। साथ ही भविष्य में किसी राजनीतिक गठबंधन में बसपा के शामिल होने की संभावनाएं भी धूमिल होती नजर आ रही हैं।

