मेरठ। निकाय चुनाव का काउंटडाउन अब शुरू हो चुका है। ऐसे में संभावित प्रत्याशी भी अपनी दावेदारी ठोकने लगे हैं। इस बार भाजपा में सबसे अधिक घमासान मचा हुआ है। प्रदेश इकाई ने मेरठ महापौर की सीट को प्रतिष्ठा का सवाल बनाया है। ऐसे में दावेदारों की महत्वाकांक्षा भी काफी तेजी से बढ़ती जा रही हैं। यूं तो सामान्य वर्ग में इस बार पंजाबी समाज का दावा महापौर के लिए मजबूत माना जा रहा। लेकिन अगर गाजियाबाद या सहारनपुर की कोई सीट पंजाबी कोटे में गई तो मेरठ का समीकरण पूरी तरह से बदल जाएगा। इन्हीं उम्मीदों के साथ मेरठ में महापौर के टिकट के लिए वैश्य, जैन एवं ब्राहृमण समाज के नेता भी भाजपा से टिकट की दावेदारी जता दी है।
हालांकि वैश्य समाज से इस समय मेरठ में सांसद, विधायक, एमएलसी और महानगर अध्यक्ष होने के बाद महापौर पद के लिए दावेदारी आसान नहीं होगी। लेकिन राजनीति में समीकरणों से ऐसा संभव होगा तो महानगर अध्यक्ष मुकेश सिंघल नए सिरे से गोटियां बिछाने लगे हैं। गाजियाबाद व सहारनपुर नगर निगम की सीट अगर पंजाबी कोटे में जाती है तो मेरठ मुकेश सिंघल महापौर के टिकट के लिए दावा ठोंकेंगे। हालांकि दिग्गजों एवं संघ का समर्थन पाना उनके लिए आसान नहीं होगा। उप्र उपभोक्ता सहकारी संघ के सभापति संजीव सिक्का भी दावेदारी जता रहे हैं। सिक्का जनसंपर्क की धार को तेज करते हुए कार्यकर्ताओं के बीच पकड़ बनाने में लगे हैं।
संयुक्त व्यापार संघ के लंबे समय तक अध्यक्ष रहे बिजेंद्र अग्रवाल क्षेत्रीय इकाई में लगातार दूसरी बार कोषाध्यक्ष हैं। भाजपा व्यापार प्रकोष्ठ के प्रदेश संयोजक विनीत शारदा भी अहम दावेदारों में हैं। इधर, जैन वर्ग ने महापौर टिकट के लिए दावा ठोंका है। सुरेश जैन ऋतुराज इस बार आगे हैं। ब्राहृमण वर्ग से डा. लक्ष्मीकांत बाजपेयी को राज्यसभा एवं धर्मेंद्र भारद्वाज को एमएलसी व विमल शर्मा को जिलाध्यक्ष बनाया है। लेकिन बदले समीकरण के तहत कमलदत्त शर्मा एवं पीयूष शास्त्री महापौर पद के लिए दावेदारी ठोक रहे हैं।
निकाय चुनाव को लेकर प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह एवं प्रदेश संगठन महामंत्री धर्मपाल पश्चिम यूपी में नोएडा,गाजियाबाद और हापुड़ में बैठक कर चुके हैं। नोएडा विधायक एवं प्रदेश उपाध्यक्ष पंकज सिंह को मेरठ नगर निगम की कमान सौंपी गई है। महापौर के लिए आरक्षण की तस्वीर अभी साफ नहीं है लेकिन सीट सामान्य वर्ग में आने की चर्चा बनी हुई है। हरिकांत अहलूवालिया 2012 से 2017 तक महापौर रहे। वो एक बार फिर अपनी उम्मीदों को आक्सीजन देने की तैयारी में हैं। उन्हें संघ से उम्मीद हैं।
महानगर अध्यक्ष मुकेश सिंघल पंजाबी कोटे से नवीन अरोड़ा, ब्राहृमण कोटे से पीयूष शास्त्री एवं वैश्य कोटे से स्वयं का नाम आगे बढ़ा सकते हैं। कैंट बोर्ड की उपाध्यक्ष रह चुकी वाधवा दंपती के पास बड़ा राजनीतिक अनुभव है। लेकिन पिछले कैंट चुनाव में भाजपा के अधिकृत प्रत्याशी विपिन सोढ़ी एवं 2017 महापौर के चुनाव में बसपाई रहते हुए भाजपा प्रत्याशी कांता कर्दम को हराने का दर्द भगवा सीने में उभर सकता है।
उद्यमी एवं शिक्षाविद् राजेश दीवान भी बड़ी संख्या में होर्डिंग लगाकर चुनावी तैयारी कर रहे हैं। हालांकि वो भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नडडा के संपर्क में 2012 से होने की बात कहते हैं। लेकिन संगठन इसे कितनी गंभीरता से लेगा यह भी बड़ा सवाल है।

