यूपी में मौसम का मिजाज तेजी से बदल रहा है। ठंड बढ़ने के साथ ही प्रदेश के कई शहरों में धुंध और कोहरे का असर दिखाई देने लगा है।
दिवाली की सुबह लखनऊ, कानपुर, मेरठ और गोरखपुर समेत 10 शहरों में धुंध छाई रही। प्रदूषण का स्तर भी खतरनाक स्थिति में पहुंच गया है।
लखनऊ का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 300 के पार दर्ज किया गया, जबकि कानपुर और गोरखपुर की हवा भी रेड जोन में पहुंच गई।
इसके अलावा श्रावस्ती, देवरिया, महराजगंज, बिजनौर, गोंडा और संभल समेत 15 शहरों में सुबह कोहरा देखने को मिला।
कई इलाकों में विजिबिलिटी घटकर महज 50 मीटर रह गई। गोंडा में सीजन का पहला घना कोहरा दर्ज किया गया।
मौसम विभाग के अनुसार, पिछले 24 घंटे में प्रदेश के कई जिलों में रात का तापमान 15 डिग्री सेल्सियस से नीचे पहुंच गया।
हरदोई प्रदेश का सबसे ठंडा जिला रहा, जहां न्यूनतम तापमान 14 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। वहीं, झांसी में अधिकतम तापमान 33.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ।
किसानों को रबी फसलों के प्रबंधन में सावधानी बरतने की सलाह
नवंबर में बारिश की संभावना को देखते हुए किसानों को रबी फसलों की बुवाई और सिंचाई में सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है। खासकर पूर्वांचल में गेहूं, चना, मटर और सरसों की बुवाई के दौरान खेतों में जल निकासी की उचित व्यवस्था रखने को कहा गया है।
निचले इलाकों में जलभराव होने से फसलों को नुकसान पहुंच सकता है। जिन खेतों में बारिश के कारण पर्याप्त नमी मौजूद है, वहां अनावश्यक सिंचाई से बचने की सलाह दी गई है। किसानों को मिट्टी की नमी और मौसम की स्थिति के अनुसार ही बुवाई और सिंचाई का निर्णय लेना चाहिए।
ठंड और कोहरे में इन फसलों का रखें विशेष ध्यान
गेहूं: शुरुआती बढ़वार के दौरान खेत में पर्याप्त नमी बनाए रखें और जलभराव न होने दें।
सरसों: लगातार कोहरा और नमी रहने से सफेद रतुआ समेत फफूंद जनित रोगों का खतरा बढ़ सकता है। फसल की नियमित निगरानी करें।
आलू: झुलसा रोग की आशंका को देखते हुए पत्तियों की जांच करते रहें। लक्षण दिखने पर कृषि विशेषज्ञों से सलाह लें।
मटर और चना: अधिक नमी और जलभराव से जड़ों को नुकसान हो सकता है। खेतों में पानी निकासी की उचित व्यवस्था रखें।
