न्यूज़ डेस्क – उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले के धराली गांव में मंगलवार देर रात बादल फटने से भारी तबाही मच गई। धराली के पास खीरगाड़ नाले में अचानक बाढ़ आ गई, जिससे नदी किनारे बने कई मकान और होटल बह गए। इस हादसे में अब तक 50 से 60 लोगों के लापता होने की सूचना है।
धराली गांव, गंगोत्री धाम के रास्ते में पड़ता है और यह एक अहम जगह है। अचानक आई इस बाढ़ से कई होमस्टे और मजदूरों के दबे होने की भी आशंका जताई जा रही है।
क्या कहते हैं एक्सपर्ट?
भूवैज्ञानिक एसपी सती का कहना है कि जहां ये हादसा हुआ है, वो इलाका पहले से ही खतरे वाला था।
1835 में भी यहां ऐसी ही बाढ़ आ चुकी है।
इस जगह को फ्लडप्लेन कहा जाता है यानी जहां पहले भी बाढ़ आ चुकी हो।
वहां बने बड़े होटल और मकान पुराने मलबे (डिपॉजिट) पर खड़े थे।
नदी किनारे का एक मंदिर भी पहले मलबे में दब गया था जिसे खुदाई से निकाला गया था।
सती ने बताया कि ग्लोबल वार्मिंग का असर अब पहाड़ों पर साफ दिखने लगा है। पहाड़ों में पहले जो बर्फ जमती थी, अब वो नहीं जम रही, और अगर तेज बारिश होती है, तो बर्फ और मलबा एक साथ नीचे गिरता है, जिससे स्नो रॉक एवलांच बनता है – यही हुआ है।
घटना का वीडियो सामने आया है जिसमें देखा गया कि सिर्फ 30 सेकंड में कई मकान बह गए। लोगों को भागने का मौका तक नहीं मिला। बड़े-बड़े पत्थर और लकड़ियां बाढ़ के साथ बहती आईं, जिससे कई लोगों के घायल या हताहत होने की आशंका है।
सरकार की प्रतिक्रिया
केंद्रीय मंत्री अजय टम्टा ने कहा कि यह बहुत बड़ी प्राकृतिक आपदा है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बताया कि एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें मौके पर पहुंच चुकी हैं और युद्धस्तर पर बचाव कार्य चल रहा है।
