- सिंध के पुलिस महानिरीक्षक मुश्ताक का पाकिस्तानी सेना द्वारा अपहरण करने का आरोप
- पीएमएल (एन) की उपाध्यक्ष मरियम नवाज शरीफ के पति की गिरफ्तारी से किया था इंकार
सुनील शर्मा
न्यूज डेस्क। पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के दामाद और पीएमएल (एन) की उपाध्यक्ष मरियम नवाज शरीफ के पति की गिरफ्तारी के बाद पूरे देश में तनाव का माहौल है। वहीं सिंध के पुलिस महानिरीक्षक मुश्ताक का पाकिस्तानी सेना द्वारा कथित अपहरण और उन पर सफदर अवान को गिरफ्तार करने का दबाव डाले जाने का मामला सामने आने के बाद पाकिस्तान की पुलिस और सेना आमने-सामने आ जाने से गृहयुद्ध जैसे हालात पैदा हो गये हैं। वहीं वकीलों के भी पुलिस के समर्थन में उतर आने से इमरान सरकार सकते में आ गयी है।
दरअसल, पीएमएल (एन) की उपाध्यक्ष मरियम नवाज शरीफ ने 11 विपक्षी दलों के महागठबंधन पीपुल्स डेमोक्रेटिक मूवमेंट (पीडीएम) द्वारा आयोजित विशाल रैली में सत्तारूढ इमरान सरकार पर जमकर निशाना साधा था। इस रैली के कुछ घंटों के बाद ही मरियम नवाज शरीफ के पति और पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के दामाद सफदर अवान को गिरफ्तार कर लिया गया। जिसके बाद पाकिस्तान में सियासी संग्राम छिड़ गया। इस मामले में किरकिरी होने के बाद पाकिस्तान सरकार ने सफदर अवान को जमानत पर रिहा कर दिया।

मगर इस मामले में पाकिस्तान की सेना और पुलिस आमने-सामने आ गयी है और देश में गृहयुद्ध जैसे हालात पैदा हो गये हैं। बताया गया कि पंजाब के गुंजरावाला में हुई रैली में नवाज शरीफ, मरियम नवाज और फजल-उर-रहमान ने जनरल बाजवा पर गंभीर आरोप लगाये थे। जिसके बाद जनरल बाजवा ने पंजाब के आईजी मुश्ताक से मरियम नवाज के पति सफदर अवान को गिरफ्तार करने को कहा था।
मगर आईजी पंजाब के इंकार करने पर तड़के चार बजे सेना के जवान, आईजी पंजाब मुश्ताक को जबरन सेना हेडक्वार्टर ले गये। पाकिस्तानी सेना ने पंजाब पुलिस के कई और वरिष्ठ अधिकारियों का भी अपहरण कर उनसे जबरन सफदर अवान की गिरफ्तारी के ऑर्डर निकलवाए। इसके बाद सफदर अवान को होटल का दरवाजा तोड़कर गिरफ्तार कर लिया गया। इसके बाद पाकिस्तान में छिडे़ सियासी संग्राम से घबराई इमरान सरकार ने सफदर अवान को जमानत पर रिहा कर दिया।

मगर इमरान सरकार पाकिस्तान पुलिस में फैले आक्रोश को समझने और मामला सुलझाने में नाकाम रही। पंजाब पुलिस प्रमुख को कथित तौर पर अगवा किए जाने और कैप्टन (रिटायर्ड) सफदर के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के प्रकरण में पुलिस अधिकारियों ने सामूहिक अवकाश पर जाने की चेतावनी दी है। सिंध के पुलिस अधिकारियों की ओर से आईजीपी महर को दी गई छुट्टी की अर्जी में कहा है कि उनके लिए पेशेवर तरीके से कर्तव्य निभाना मुश्किल हो गया है। सूत्रो के अनुसार दो एआईजी, सात डीआईजी और सिंध पुलिस के छह वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों (एसएसपी) ने छुट्टी पर जाने के लिए आवेदन किया है। वहीं पाकिस्तान के अधिवक्ताओं के पुलिस के समर्थन में आगे आ जाने से सरकार और संकट में आ गयी है। पहले से ही विपक्षी दलों के सवालों में घिरी इमरान सरकार के लिये अब पुलिस और अधिवक्ताओं को समझा पाना मुश्किल हो रहा है।
पीएमएल (एन) नेता और सिंध के पूर्व गवर्नर मुहम्मद जुबैर के एक कथित ऑडियो संदेश में जुबैर ने आरोप लगाया कि सिंध के पुलिस महानिरीक्षक मुश्ताक का अपहरण कर लिया गया है और उन पर मरियम, उनके पति सफदर और 200 अन्य लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का दबाव डाला गया था। पुलिस प्रमुख पर मोहम्मद अली जिन्ना के मकबरे की पवित्रता के कथित उल्लंघन के लिए यह कार्रवाई करने का दबाव डाला गया। वहीं पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) के प्रमुख बिलावल भुट्टो-जरदारी ने सेना और पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई से सफदर की गिरफ्तारी को लेकर सवाल पूछा था। जिसके बाद खुद जनरल बाजवा ने बिलावल भट्टों को फोन कर इस मामले में उच्चस्तरीय जांच कराने का आदेश देने की बात कही है। इससे जाहिर होता है कि इमरान सरकार किस प्रकार दबाव में है।

