- भारत-अमेरिका गठजोड़ से चीन-पाकिस्तान में खलबली
- साउथ चाइना सी में चीन की दादागीरी हो सकती है समाप्त
- तालिबान का समर्थन करने पर पाकिस्तान से नाराज है अमेरिका
सुनील शर्मा
न्यूज़ डेस्क। भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के अमेरिका जाने से पूर्व ही चीन का चैन छीन गया था तो पाकिस्तान बेचैन हो गया था। इन दोनों देशों की बेचैनी बेमानी भी नहीं है। दरअसल विश्व की महाशक्ति बनने का ख्वाब देख रहे चीन के लिये भारत और अमेरिका की नजदीकी उसका सुनहरा सपना तोड़ने वाली हो सकती है। वहीं तालिबान का समर्थन करने वाले पाकिस्तान से अमेरिका बेहद नाराज है। ऐसे में भारत से बढ़ी अमेरिका की नजदीकियां पाकिस्तान को मुश्किल में डाल सकती हैं। वहीं अमेरिका को भी हिंद-प्रशांत क्षेत्र में दबदबा कायम करने के लिये एक विश्व्सनीय दोस्ता की जरूरत है जो भारत से बेहतर और कोई नहीं हो सकता।
भारत-अमेरिका की जुगलबंदी क्यों कर रही चीन को परेशान
साउथ चाइना सी में चीन अपना एकाधिकार बनाये रखने का प्रयास करता है। इससे आस्ट्रेलिया, भारत और जापान की सुरक्षा को खतरा होता है। खासकर चीन की संदिग्र नीतियों को देखते हुए उस पर विश्वा्स करना भी मुश्किल है। गौरतलब है कि चीन की बड़ी चुनौती पर लगाम कसने के उद्देश्य से ही वर्ष 2007 में क्वॉड की अनौपचारिक शुरूआत हुई थी। अमेरिका के समर्थन से क्वॉड को मजबूती मिली और भारत, जापान, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका की नौसेना एक साथ युद्वाभ्याअस कर चुकी है। जापानी राष्ट्रपति तो चीन के सैन्य विकास को जापान की शांति और समृद्वि के लिये खतरा बता चुके हैं। ऐसे में चीन को डर इस बात का है कि क्वॉड शिखर सम्मेलन में भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेेलिया मिलकर उस पर लगाम कसने का प्रयास अवश्य करेंगे।
वहीं कोविड-19 महामारी के वायरस को दुनिया भर में फैलाने का आरोप भी चीन पर लग चुका है और कोविड महामारी फैलने के बाद उसकी गतिविधियां संदेहपूर्ण हैं। वहीं तालिबान की पैरवी करने वाले पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान का खुलकर समर्थन करने के कारण चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग अमेरिकी नेताओं के निशाने पर हैं। अमेरिका का मानना है कि तालिबान समर्थक पाकिस्तान और चीन एक साथ मिलकर विश्व शान्ति के लिये खतरा बन सकते हैं।
वैश्विक समस्याएं हल कर सकते हैं भारत और अमेरिका
पाकिस्तान क्यों हो रहा है बेचैन
अब तक अमेरिका से मिले दान के सहारे जिंदा पाकिस्तान की बेचैनी भी साफ जाहिर हो रही है। आतंकियों के समर्थन करने का आरोप पहले से ही झेल रहे पाकिस्तान ने अफगानिस्तान में अमेरिकी सेना वापस होने के बाद तालिबान की हुकुमत कायम होने की पैरवी की थी। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान खुलकर तालिबान के समर्थन में बयान दे चुके हैं। इससे अमेरिका में पाकिस्तान के प्रति नाराजगी का माहौल बन गया। अमेरिका की ओर से पाकिस्तान को स्पष्ट चेतावनी दी जा चुकी है। वहीं अमेरिकी नेताओं द्वारा पाकिस्तान पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग भी की जा रही है। ऐसे में पाकिस्तान का चिंतित होना लाजमी है। उसे डर है किे अमेरिका उसे देने वाली आर्थिक मदद पर रोक न लगा दे। वहीं अमेरिका यदि भारत से दोस्ती निभाएगा तो उसका अमेरिका से दूर हो जाना स्वाभाविक है। तंगहाली से गुजर रहे पाकिस्तान के लिये यह झटका विनाशकारी साबित हो सकता है। वहीं तालिबान से नजदीकियां बढ़़ाने पर उस पर अन्य प्रतिबंध लगाये जाने की संभावनाएं भी हैं।
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अमेरिका के लिये भी फायदेमंद है भारत से दोस्ती
भारत से दोस्ती करना अमेरिका के लिये भी फायदेमंद है। दक्षिण एशिया में भारत जैसा शक्तिशाली दोस्त न सिर्फ क्षेत्र में शांति बहाल रखने में सहायक होगा बल्कि चीन के बढ़ते कदम को रोकने में भी मदद करेगा। अफगानिस्तान में लंबे समय तक काबिज रहे अमेरिका के लिये तालिबान बड़ा खतरा बन सकता है। ऐसे में यदि चीन, पाकिस्तान और तालिबान एकजुट हो गये तो वह न सिर्फ अमेरिका बल्कि पूरे विश्व के लिये खतरा बन सकते हैं। भारत से दोस्तीे ऐसे किसी गठजोड़ को नाकाम बनाने में सक्षम है।
वहीं भारत एक बहुत बडे़ बाजार के रूप में भी जाना जाता है। चाइना से काफी माल भारत में बिकता था जिसपर प्रतिबंध लगा दिया गया है। ऐसे में अमेरिका के लिये भारतीय बाजार अवसर के रूप में सामने आ सकता है। वहीं सैन्य हथियारों का बडे़ स्तर पर उत्पादन करने वाले अमेरिका से भारत ने काफी समय से कोई डील नहीं की है। अमेरिका के बजाये भारत ने अन्य देशों से हथियार खरीदे हैं जो अमेरिका के हथियार कारोबार को नुकसान पहुंचाने वाला है। अपनी सैन्य शक्ति को मजबूत करने में जुटे भारत को अमेरिका सैन्य हथियार के बडे़ खरीदार के रूप में भी देखता है। जाहिर है कि व्यापारिक लाभ भी इस दोस्ती की बुनियाद हो सकते हैं।

