मेरठ। चीन की मोबाइल कंपनी वीवो अब डाटा लीक मामले में भी घिर रही है। चीनी कंपनी वीवो ने खेल करते हुए एक ही आईएमईआई मोबाइल नंबर पर साढ़े तेरह हजार से अधिक मोबाइल चला दिए। इसकी जांच दोबारा से नए सिरे से मेरठ पुलिस द्वारा की जा रही है। साइबर सेल और क्राइम ब्रांच अब यह भी पता लगा रहा है कि कहीं चीन की मोबाइल कंपनी वीवो ने ग्राहकों का डेटा तो लीक नहीं किया। हलांकि अधिकारी ये मान रहे हैं कि ऐसा जरूर हुआ होगा। क्योंकि एक ही आईएमईआई नंबर पर जब हजारों की संख्या में मोबाइल उपयोग में लाए जा रहे थे तो इसमें लोगों की प्राइवेसी कहा तक गुप्त रह पाती है। वीवो कंपनी ने लिखित में भरोसा जताया है कि ग्राहकों का संवेदनशील डाटा सुरक्षित है। कंपनी ने कहा है कि क्रेडिट कार्ड और डेबिट कार्ड जैसी संवेदनशील जानकारी पर डाटा लीक का असर नहीं पड़ा है। इसी के साथ प्रभावित यूजर्स को सुरक्षा देने के लिए कंपनी ने अतिरिक्त कदम उठाने की बात कही है। लेकिन इससे जांच अधिकारी संतुष्ट नहीं हैं।
वो नए सिरे इसकी जांच करवा रहे हैं। वीवो कंपनी की इतनी बड़ी लापरवाही के सामने आने के बाद से लोगों में भी अब कंपनी के प्रति विश्वनीयता घटी है। बता दें कि यह पहली बार ऐसा हुआ है जब किसी चीन कंपनी ने इतने बड़े पैमाने पर लापरवाही से एक ही नंबर के आईएमईआई पर हजारों मोबाइल बाजार में झोंक दिए। मामला पकड़ में आने के बाद भी कंपनी के अधिकारी गंभीर नहीं हुए और उन्होंने बाजार से लॉट भी वापस नहीं मंगवाया। इसके उलट कंपनी मामले की लीपापोती में जुट गई। कंपनी की इसी लीपापोती के चलते ही मेरठ पुलिस जांच के नाम पर पूरे मामले में एफआर लगा चुकी है। लेकिन मेरठ आईजी प्रवीण कुमार और एडीजी राजीव सभरवाल ने इसको इस प्रकरण पर फिर से विचार कर इसकी जांच के आदेश दिए। जब से वीवो कंपनी के इस प्रकरण की जांच शुरू हुई है।
वीवो कंपनी के अधिकारियों के चेहरे की हवाइयां उड़ी हुई हैं। कंपनी के अधिकारियों ने जांच अधिकारियों से संपर्क करने की भी कोशिश की है। लेकिन जांच अधिकारियों ने साफ मना कर दिया है। वीवो कंपनी और जांच अधिकारी के बीच जो भी बातचीत हो रही है सब कागजों और ईमेल के माध्यम से की जा रही है। हालांकि जिन लोगों के पास वीवो कंपनी का मोबाइल है वो अब इस बात से डरे हुए हैं कि कहीं पर्सनल जानकारी तो लीक नहीं हो रही है। वीवो कंपनी द्वारा डाटा लीक से जुड़े मामले की विस्तार से जांच की जा रही है।

