नई दिल्ली। अफगान पर तालिबान के कब्जे के बाद से चीन कुछ ज्यादा ही सक्रिय नजर आ रहा है। आगे बढ़कर तालिबान को अपना समर्थन देने वाले चीन ने अब एक नया दांव खेला है। चीन ने इस बात के संकेत दिये हैं कि वो तालिबानी कब्जे वाले अफगानिस्तान को फाइनेंशियल सपोर्ट देगा। असल में तालिबान के सत्ता पर कब्जे के बाद से काबुल को तमाम देशों से मिलने वाली आर्थिक सहायता रोके जाने के बीच चीन आगे आया है। एक ओर चीन की मंशा अमरीको अफगान में जहां फंसाये रखने की है, वहीं वह अफगानियों ही नहीं तालिबानियों में भी अपनी पैठ मजबूत करने की फिराक में है। यानि एक तीर से दो निशाने करने को है चीन।
चीन के मुताबिक, वह युद्धग्रस्त देश की सहायता करने में पॉजीटव रोल अदा करेगा। चीनी विदेश मंत्रालय के स्पोक्स-पर्सन वांग वेनबिन ने अमरीका को निशाने पर लेते हुए कहा है कि वह अफगान संकट के लिए खास गुनहगार है और अमरीका, अफगानिस्तान दोबारा खड़ा किये बगैर भाग नहीं सकता। निर्वासन में रह रहे, अफगानिस्तान के सेंट्रल बैंक के चीफ के अनुसार फाइनेंशियल सपोर्ट के लिए अमरीका की मदद पर अंकुश लग जाने के कारण तालिबान चीन और पाकिस्तान की ओर देखेगा।
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इस प्रतिक्रिया के बावत वेनबिन ने कहा, मैं साफतौर पर कहूंगा कि अफगान मसले के लिए अमरीका ही खास अपराधी है। वह इस तरह हमारे देश को आफत में धकेलकर बच कर जा नहीं सकता। कहा कि, हमें आशा है कि अमरीका ह्यूमन सपोर्ट और देश को पुन: खड़ा करने के अपने वायदे को निभाएगा और इससे पीछे नहीं हटेगा।
पिछले हफ्ते न्यूयॉर्क टाइम्स की न्यूज के मुताबिक, अफगानिस्तान में मिशन समाप्त होने के बाद भी अफगान सेंट्रल बैंक से जुड़े अरबों डॉलर रकम अमरीका के नियंत्रण में है। यूरोपीय संघ के अफसरों की प्रतिक्रिया दी है कि, जब तक ऑफिसर्स सिचुएशन के बारे में सफाई नहीं देंगे अफगानिस्तान को भुगतान नहीं होगा। जर्मनी के मुताबिक भी तालिबानी सत्ता होने और शरिया कानून लागू होने पर वह फाइनेंशियल हेल्प नहीं देगा।
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