कीव। यूक्रेन पर रूस द्वारा 24 फरवरी को किए गए हमले को अब तक छह माह से अधिक हो गए हंै। लेकिन ये लड़ाई किसी अंजाम तक नहीं पहुंची है। इस हमले से चीन व अमेरिका को छोड़कर बाकी देश हैरान थे। रूस राष्ट्रपंति व्लादिमीर पुतिन छह माह से सबसे जोखिमभरी लड़ाई लड़ रहे हैं, ऐसे में सवाल हैं कि इससे चीन कोई सबक ले रहा या नहीं? क्या वह ताइवान पर हमले में पुतिन जैसी गलती को दोहराने का काम करेगा। यह सवाल अहम है, इस पर संबद्ध पक्षों की राय अलग है। कहा जा रहा है कि चीन ताइवान में रूस की तरह गलतिया नहीं करेगा।
जानकारों की माने तो चीन के पास यूक्रेन की जंग से सबक लेना का समय है। उसका इरादा अपने पड़ोसी देश ताइवान पर कब्जे का है। वह ताइवान में रूस की तरह गलती नहीं करेगा। वाशिंगटन के राष्ट्रीय सामरिक संस्थान में चीनी सैन्य मामलों के विशेषज्ञ डॉ. जोएल वुथनो ने उन सबक का जिक्र किया जो चीन और पीएलए यूक्रेन लड़ाई से ले सकते हैं। ‘यूक्रेन से चीन को सैन्य सबक‘ शीर्षक की रिपोर्ट में कहा कि पीएलए ने इस विषय पर अब तक न के बराबर विचार किया। पीएलए को रूस द्वारा की गलतियों से खुद को दूर रखना चाहिए।
चीनी रक्षा मंत्रालय प्रवक्ता कर्नल वू कियान ने मार्च में कहा था कि ‘ताइवान यूक्रेन नहीं है‘। वह चीन का अविभाज्य हिस्सा है। ताइवान का प्रश्न चीन के आंतरिक मामले में बाहरी हस्तक्षेप का मामला है, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। कियान ने कहा कि ताइवान की खाड़ी में दोनों पक्षों को फिर से एक होना चाहिए यह एक दिन होगा। यह इतिहास की प्रवृत्ति है जिसे कभी किसी या किसी भी बल द्वारा रोका नहीं जा सकता है।
