64 बच्चे हर दिन हो रहे हैं कोरोना से संक्रमित
बीते 40 दिनों में 2584 बच्चों मिले संक्रमित
देहरादून। उत्तराखंड में बढ़ते जा रहे कोरोना संक्रमण के कोप का शिकार अब राज्य के बच्चे भी होने लगे हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार बीते 40 दिनों में 2584 बच्चों मंे कोरोना का संक्रमण मिला है। प्रतिदिन 64 बच्चे कोरोना संक्रमित हो रहे हैं। बच्चों के कोरोना संक्रमित होने से जहां अभिभावक चिंतित हैं वहीं राज्य सरकार की परेशानी भी बढ़ गयी हैं।
उत्तराखंड में कोरोना संक्रमण के मामले नये रिकार्ड बनाते जा रहे हैं। हर दिन कोरोना संक्रमितों और संक्रमण से हो रही मौत के आंकड़े दहशत पैदा कर रहे हैं। वहीं अब शून्य से लेकर नौ वर्ष के बच्चों के कोरोना से संक्रमित होने के मामले सामने आने से हालात और गंभीर हो गये हैं। बच्चों के संक्रमित होने से अभिभावकों में दहशत का माहौल है। वहीं पहले ही बदहाल हो चुकी स्वास्थ सेवाएं बच्चों को उपयुक्त उपचार देने में पूर्णतया सक्षम नजर नहीं आ रहीं। ऐसे में यदि बच्चों में संक्रमण बढ़ा तो उनका इलाज करना मुश्किल हो सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार कोरोना की तीसरी लहर बच्चों को प्रभावित कर सकती है। मगर बात करें उत्तराखंड की तो यहां कोरोना की दूसरी लहर ही बच्चों को संक्रमण का शिकार बना रही है। गुजरे 40 दिनों के भीतर राज्य में 2584 कोरोना से संक्रमित मिले हैं। औसतन 64 बच्चे प्रतिदिन कोरोना से संक्रमित हो रहे हैं। राज्य में अब तक 0 से 9 वर्ष आयुवर्ग के 4718 बच्चे कोरोना से संक्रमित पाये गये हैं।
उत्तराखंड में काफी समय से बच्चों के स्कूल बंद हैं। वहीं सामान्य गतिविधियां भी बंद होने के कारण बच्चों का घर से निकलना नहीं हो पा रहा है। ऐसे मंे माना जा रहा है कि बच्चों में कोरोना संक्रमण घर से बाहर जाने वाले उनके परिवार के ही किसी बड़े सदस्य से आया हो।
अभिभावक बरतें सावधानी, बच्चों को संक्रमण से बचायें
बच्चों में फैल रहे संक्रमण को रोकने के लिये परिवार के ऐसे सदस्य जो घर से बाहर जाकर लोगों से मिलते-जुलते हों, को भी सावधानी बरतनी जरूरी है। जिनके परिवार में भी छोटे बच्चे हैं उन्हें बाहर से घर आते ही बच्चों से नहीं मिलना चाहिये। पहने हुए कपड़ों को घर से बाहर रखकर सेनेटाईज करने के अलावा नहाने और स्वच्छ कपड़े पहनने के बाद ही घर के भीतर जाना चाहिये। खुद को अच्छी तरह से स्वच्छ कर लेने के बाद ही छोटे बच्चों के करीब जाने से बच्चों को संक्रमण से सुरक्षित रखा जा सकता है। वहीं बच्चों को घर के भीतर ही रखें और यथासंभव अन्य लोगों के संपर्क में आने से बचायें। क्योंकि बचाव हमेशा से ही उपचार से बेहतर होता है।

