अग्निपथ योजना पर भड़के बवाल के बाद आज देश की तीनों सेनाओं के प्रमुखों ने इस योजना को और बेहतर ढंग से समझाने के लिए प्रेस कांफ्रेंस की जिसमें उन्होंने कई बातों को साफ़ किया। सेना प्रमुखों ने कहा कि फ़ौज में अनुशासनहीनता की कोई जगह नहीं, सेना में अग्निवीरों की भर्तियां आने वाले सालों में सवा लाख तक जाएंगी और अब से सारी भर्तियां अग्निपथ योजना के तहत ही होंगी, यानि की पुरानी भर्ती की प्रक्रिया अब पुरानी बात हो चुकी है और सबसे बड़ी बात कि चाहे जितना विरोध हो अग्निपथ योजना वापस नहीं होगी।
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सैन्य मामलों के विभाग में अतिरिक्त सचिव लेफ्टिनेंट जनरल अरुण पुरी ने सबसे पहले तो अग्निपथ योजना के बारे पत्रकारों को विस्तार से समझाया जो पहले भी पब्लिक डोमेन में आ चूका है और जिसकी सबको जानकारी है, फिर भी उन्होंने बड़ी बारीकी से योजना की सम्पूर्ण जानकारी दी, भर्तियां कब और कैसे शुरू होंगी, पहला अग्निवीर कब सेना में रिपोर्ट करेगा, सबकुछ। इस दौरान जनरल पूरी ने एक बार फिर दोहराया कि हिंसा करने वालों की सेना में कोई जगह नहीं है. उनके मुताबिक पिछले दिनों इस योजना के खिलाफ हो रही हिंसा में जिस युवा ने हिस्सा लिया होगा उसको अग्निवीर बनने का मौका नहीं मिलेगा क्योंकि अग्निवीर बनने वाले हर उम्मीदवार से एक हलफनामा लिया जायेगा और सभी लोगों का पुलिस वेरिफिकेशन न अनिवार्य होगा।
जनरल पूरी ने आगे कहा कि यह एक शुरुआत है जो 46000 हज़ार अग्निवीरों से शुरू हुई है, हमें अगले 4-5 वर्षों में 50,000-60,000 सैनिकों की जरूरत होगी आगे और बढ़कर सवा लाख तक हो जाएगी। उन्होंने इसके साथ ही स्पष्ट किया कि अग्निवीरों के लिए आरक्षण की घोषणा प्लांड थी, यह फैसला इस लिए नहीं लिया गया कि इस योजना के विरोध में हिंसा भड़की। उन्होंने कहा कि इसी तरह राज्य सरकारों द्वारा भी अग्निवीरों समाहित करने की बात पहले से तय हो चुकी है और इसी तरह कॉर्पोरटे जगत से भी अग्निवीरों को समाहित करने के बारे में हाई लेवल पर बातें हो चुकी थीं.
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अग्निपथ योजना पर भड़की हिंसा और राजनीतिक विरोध के चलते योजना के वापस लेने की बात पर आर्मी चीफ ने साफ़ तौर पर इंकार कर दिया। जब उनसे यह सवाल किया गया कि पुरानी भर्ती योजना के साथ ही अग्निपथ योजना क्या नहीं चलाई जा सकती तो उनका जवाब था कि अब से सेना में सारी भर्तियां अग्निपथ योजना के तहत ही होंगी।

