Chandrayaan-3: पत्थर आए या चट्टान लैंडिंग करेगा चंद्रयान, Isro की तैयारी जान हो जाएंगे हैरान

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Chandrayaan-3 is one step away from landing on moon: इस बार अपना चंद्रयान-3 पूरी तैयारी के साथ चांद की सतह पर उतरने की तैयारी में है। वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर Chandrayaan-3 के सामने पत्थर या चट्टान भी आ गई तो भी वो संभल जाएगा। वैज्ञानिकों ने इस बार Chandrayaan-3 की चांद पर लैंडिंग के कई विकल्प पास में रखे हैं। विश्व के सभी देश अपने Chandrayaan-3 की साफ्ट लैंडिंग पर टकटकी लगाए हुए हैं।

Chandrayaan-3 की सफल लॉंचिंग बाद अब चंद्रमा की सतह पर उसके सुरक्षित एवं सॉफ्ट लैंडिंग की घड़ी नजदीक आती जा रही है। अब से 48 घंटे बाद अपना Chandrayaan-3 चांद की धरती पर उतर चुका होगा। इसकी तैयारी इसरो वैज्ञानिकों की टीम ने पूरी की है। अंतरिक्ष वैज्ञानिकों की टीम ने Chandrayaan-3 की सॉफ्ट लैंडिंग के दौरान, ‘लास्ट मिनट्स ऑफ टेरर’ जोखिम को खत्म कर दिया है। Chandrayaan-3 लैंडिंग के समय वे सभी विकल्प मौजूद होंगे। जिनका उपयोग किसी भी आपात स्थिति में सुरक्षित लैंडिंग के लिए हो सकता है।

दुनिया के सभी देशों की निगाहें भारत के चंद्रयान-3 पर टिकी हैं। इस समय अमेरिका, रूस और चीन Chandrayaan-3 की सॉफ्ट लैंडिंग पर नजर लगाए बैठे हुए हैं। इसकी वजह, चांद की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग कराने का मुकाम इन्हीं देशों को अभी तक हासिल हो सका है। Chandrayaan-3 की लैंडिंग के समय कोई चट्टान आई या उतरने वाली जगह समतल नहीं तो ऐसे में उसकी दिशा बदलने का विकल्प रखा है। इस बार Chandrayaan-3 सॉफ्ट लैंडिंग में कठोर जैसा कुछ नहीं है। Chandrayaan-3 के लिए स्प्रिंग पर आधारित सिस्टम तैयार किया है।

Chandrayaan-2 के हर पहलू का बारीकी से अध्ययन

सितंबर 2019 में Chandrayaan-2 जब चांद की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग का प्रयास कर रहा था तो विक्रम लैंडर से उसका संपर्क टूट गया था। वह सब, आखिरी 15 मिनट में हुआ था। यही कारण है कि सॉफ्ट लैंडिंग की प्रक्रिया में ‘लास्ट मिनट्स ऑफ टेरर’ कर खतरा है। इसे अंतिम क्षण का जोखिम कहते हैं। यही समय होता है जब अंतरिक्ष वैज्ञानिकों की सांसें थम सी जाती हैं। सितंबर 2019 में Chandrayaan-2 के साथ जो कुछ हुआ। इस बार उसके सभी पहलुओं का अध्ययन किया गया। भारतीय वैज्ञानिकों ने सभी विकल्पों को लिया है। जिनका उपयोग किसी आपात स्थिति में सुरक्षित लैंडिंग के लिए होता है। इसके लिए इसरो में एक-दो नहीं, बल्कि अनेक ‘ब्रेन स्टॉर्मिंग’ सत्र आयोजित किए गए हैं। इन्हीं के द्वारा, Chandrayaan-3 की सुरक्षित लैंडिंग तैयारी की गई है। अगर Chandrayaan-3 की सतह पर उतरते समय कोई परेशानी आई तो उसे दूर किया जाएगा।

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