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चंद्रशेखर आजाद ने अखिलेश यादव को 17 जनवरी तक का दिया समय, फिर भी बात नहीं बनी तो 18 जनवरी को जारी करेंगे अपना घोषणा पत्र


चंद्रशेखर आजाद ने अखिलेश यादव को 17 जनवरी तक का दिया समय, फिर भी बात नहीं बनी तो 18 जनवरी को जारी करेंगे अपना घोषणा पत्र

लखनऊ। चंद्रशेखर आजाद और समाजवादी पार्टी के बीच गठबंधन की संभावनाएं अभी खत्म नहीं हुई है। शनिवार को राजधानी लखनऊ में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान चंद्रशेखर आजाद ने अखिलेश यादव पर गंभीर आरोप लगाए लेकिन उसके बाद जारी प्रेस रिलीज के जरिए उन्होंने कहा है कि अखिलेश यादव को 17 जनवरी तक विचार-विमर्श करने का समय है। अगर इसके बाद भी वह रिस्पांस नहीं करते हैं तो 18 जनवरी को छोटे दलों के साथ एक अलग मोर्चा बनाकर गठबंधन किया जाएगा और साथ ही स्टांप पेपर पर घोषणा पत्र जारी किया जाएगा।

Azad समाज पार्टी की ओर से जारी इस प्रेस रिलीज में कहा गया है कि आसिफा और समाजवादी पार्टी के बीच गठबंधन को लेकर भ्रामक खबरें चलाई जा रही थी लेकिन अभी तक यह फाइनल नहीं हुआ है। हालांकि पार्टी ने स्वीकार किया है कि अखिलेश यादव और चंद्रशेखर आजाद के बीच पिछड़ों अति पिछड़ों मुसलमानों पसमांदा मुसलमानों और दलित समाज के कुछ महत्वपूर्ण बिंदुओं को लेकर के चर्चा हुई है। इसके अलावा 2012 से 2017 तक की सपा सरकार के दौरान प्रमोशन में आरक्षण के मामले में जिस प्रकार की कार्यवाही हुई थी उसको लेकर समाजवादी पार्टी की छवि दलित विरोधी बनी हुई है। Azad समाज पार्टी ने इस मामले पर कहा कि की प्रमोशन मैं आरक्षण के मामले को लेकर के दलित वर्ग में समाजवादी पार्टी के प्रति भारी नाराजगी है। इसको लेकर सामाजिक आर्थिक शैक्षणिक दिशा निर्देशन पर चर्चा की जानी बहुत जरूरी है। पार्टी ने बताया कि इसके लिए तमाम दलितों के सामाजिक संगठनों और और बुद्धिजीवियों से लगातार चर्चा की गई है।

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इस चर्चा का निष्कर्ष निकलकर यह आया है कि सपा से गठबंधन उसी आधार पर किया जाए जब वह प्रमोशन में आरक्षण के मामले को बहाल करने का वादा करें। साथ ही सहमति के साथ जो भी घोषणा पत्र बने वह स्टांप पेपर पर लिखा जाए ताकि चुनाव के बाद सरकार बनने पर नेताओं से सवाल जवाब संवैधानिक अधिकारों के साथ किया जा सके। इसके अलावा पार्टी ने कहा है कि जब से आसपास सपा की गठबंधन को लेकर खबरें आ रही हैं उत्तर प्रदेश के अल्पसंख्यक मुस्लिम समाज और उसमें खासकर पसमांदा मुसलमानों के कई प्रतिनिधि संगठनों ने आकर मुलाकात की है। इन संगठनों के लोग चाहते हैं कि समाजवादी पार्टी ने जिस तरह 2012 के विधानसभा चुनाव में अपने घोषणा पत्र में कहा था कि सरकार बनने के बाद 18 परसेंट आरक्षण दिया जाएगा। पुलिस और पीएसी जैसी भर्तियों में 15% मुसलमानों की अनिवार्य भर्ती की जाएगी इसके अलावा जस्टिस सच्चर कमेटी और रंगनाथ मिश्रा कमीशन की सिफारिशों को लागू करने का वादा किया गया था लेकिन सरकार बनने के बाद 5 साल तक इस वादे पर न कोई बात हुई ना इसको पूरा किया गया।

सपा ने कहा है कि जिस तरीके से पसमांदा मुसलमानों से किए गए वादे पर वादाखिलाफी हुई है इस समाज में रोष है। यह लोग एक बार फिर से चाहते हैं कि इस बार भी घोषणा पत्र में इस मुद्दे को शामिल किया जाए और सरकार बनने पर पूरा किया जाए। आजाद समाज पार्टी ने दावा किया है कि उन्होंने इस दोनों मुद्दे पर दलित पिछड़े और मुस्लिम समाज के लोगों से यह वादा किया है कि गठबंधन होने और सरकार बनने के बाद पूरी कोशिश होगी कि 3 महीने के अंदर सभी धर्मों और जातियों की जनगणना कराई जाए। जिसके आधार पर जातियों की आबादी के अनुपात पर शासन-प्रशासन सरकार और सरकारी योजनाओं में हिस्सेदारी सुनिश्चित की जाएगी। जिससे कि किसी भी व्यक्ति वर्ग समाज के साथ कोई नाइंसाफी ना होने पाए। इसके अलावा घोषणा पत्र भी स्टांप पेपर पर सामूहिक रूप से हस्ताक्षर कर तैयार किया जाएगा। इन सारे मुद्दों को लेकर अखिलेश यादव से बात हुई है फिलहाल अभी तक उनकी तरफ से रिस्पांस नहीं आया है।

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सीटों के बंटवारे को लेकर आजा समाज पार्टी ने कहा है कि अखिलेश यादव के साथ चर्चा हुई है। हालांकि आजाद समाज पार्टी मूल रूप से दलितों पिछड़ों और अल्पसंख्यकों के हितों की लड़ाई लड़ती है और पार्टी में भी इस समाज के लोगों को जगह देती है। इसलिए गठबंधन भी उसी आधार पर होगा जब इन समाज के लोगों की भागीदारी सुनिश्चित होगी। खासकर अति पिछड़े हिंदू समाज दलितों और पसमांदा मुसलमान की कुल आबादी 50 फ़ीसदी है जिन्हें आज तक इनकी आबादी के अनुपात में किसी भी राजनीतिक दलों ने भागीदारी नहीं दी है। पार्टी ने दावा किया है कि वह जब भी गठबंधन करेंगे तो जातिगत आबादी के अनुपात में हिस्सेदारी दी जाएगी। Azad समाज पार्टी ने यह भी कहा है कि इन सारे मामलों को लेकर के हमें akhilesh Yadav से चर्चा की है और उन्हें 17 जनवरी तक का समय दिया है। अगर अखिलेश यादव 17 जनवरी तक हमारे मुद्दों को लेकर के कोई बात नहीं करते हैं तो Azad समाज पार्टी 18 जनवरी को समान विचारधारा वाली छोटी बड़ी राजनीतिक पार्टियों के साथ गठबंधन कर अपना अलग घोषणापत्र जारी करेंगे जो स्टांप पेपर पर होगा साथ ही 2022 का शंखनाद भी करेंगे। आजाद समाज पार्टी ने कहा है कि स्टांप पेपर पर हम इसलिए अपना घोषणा पत्र जारी कर रहे हैं ताकि सरकार बनने के बाद हमारी जवाबदेही संवैधानिक बनी रहे।

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