अभी कल ही पीठासीन अधिकारी द्वारा विपक्ष के आठ के वोट अवैध घोषित करने के बाद चंडीगढ़ मेयर के लिए भाजपा के उम्मीदवार मनोज कुमार सोनकर के चुनाव को 12 के मुकाबले 16 वोटों से वैद्यता दी गयी थी। मामला पंजाब एंड हरियाणा हाई कोर्ट पहुंचा और कोर्ट ने मामले की सुनवाई की और चंडीगढ़ नगर निगम और प्रशासन को नोटिस जारी कर एक हफ्ते में जवाब मांग लिया.
बता दें कि चंडीगढ़ मेयर का चुनाव जो पहले 18 जनवरी को होना था, पीठासीन अधिकारी अनिल मसीह के संदेहास्पद तरीके से अचानक बीमार पड़ जाने की वजह से टल गया था जो हाई कोर्ट के हस्तक्षेप से कल यानि 30 जनवरी को अनिल मसीह की ही देखरेख में हुआ. अनिल मसीह को भाजपा का बहुत करीबी बताया जाता है। आरोप है कि अनिल मसीह ने चुनाव में धांधली करके भाजपा उम्मीदवार को जिताया है. विपक्ष का आरोप है कि अनिल मसीह ने जानबूझकर विपक्ष के आठ वोटों को इनवैलिड घोषित किया है. इसका एक वीडियो भी सोशल मीडिया में खूब वायरल हो रहा है जिसमें अनिल मसीह बैलेट पेपर्स पर कुछ लिखते हुए नज़र आ रहे हैं. चंडीगढ़ नगर निगम में 36 वोट हैं. भाजपा के 15, आम आदमी पार्टी के 11 और कांग्रेस के 9 सदस्य हैं, एक सदस्य शिरोमणि अकाली दल का है। भाजपा उम्मीदवार को 16 वोट मिले वहीँ विपक्ष के उम्मीदवार को 20 वोट लेकिन विपक्ष के आठ वोटों को अवैध घोषित कर दिया गया और भाजपा उम्मीदवार की जीत का एलान कर दिया गया.
आम आदमी पार्टी ये मामला पंजाब एंड हरियाणा हाई कोर्ट लेकर पहुंची जहाँ अदालत ने मामले की सुनवाई कर चंडीगढ़ नगर निगम प्रशासन से एक हफ्ते में जवाब माँगा है. अदालत में मामला कुलदीप सिंह लेकर गए जो विपक्ष के साझा उम्मीदवार थे, कुलदीप कुमार ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर चंडीगढ़ के मेयर चुनाव में गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए बीजेपी से नवनियुक्त मेयर मनोज कुमार सोनकर को पद से निरस्त करने की मांग की। सुनवाई के दौरान सरकारी वकील ने अदालत में कहा कि चंडीगढ़ मेयर चुनाव में हेराफेरी की गई है। उनका कहना था कि एक तो पीठासीन अधिकारी लेट आए, सके अलावा कुछ बैलेट पेपर पहले से ही मार्क थे। उन्होंने अदालत से मतदान का रिकॉर्ड मंगवाने और जांच करने का आग्रह किया।

