रिश्ते:- वैसे तो बड़े बड़े ज्ञानी पुरुषों ने रिश्ते को मजबूत बनाने के कई उपाय बताए हैं। लेकिन रिश्तों को लेकर चाणक्य ने कुछ ऐसे तर्क दिए हैं जो रिश्ते में जान डाल देते हैं। चाणक्य ने जीवन को बेहद उम्दा तरीके से समझाया है और हर परिस्थिति का व्याख्यान चाणक्य शास्त्र में किया गया है। वही रिश्ते में मधुरता और सामंजस्य स्थापित करने के हित मे चाणक्य ने चाणक्य शास्त्र ने चार मूल मंत्रों का व्याख्या किया है जो इस प्रकार है…
भाषा मे लाए मधुरता:-
चाणक्य ने रिश्तों में मजबूती और माधुर्य स्थापित करने के संदर्भ में कहा है कि व्यक्ति को अपने रिश्ते में मजबूती लाने के लिए वाणी में माधुरता और विनम्रता लानी चाहिए। क्योंकि यह रिश्तों को मजबूती प्रदान करती है। वही अगर आप कठोर और ऊंची आवाज में किसी से बात करते हैं तो यह आपके रिश्ते में दरार डालता है और आपका रिश्ता खराब हो जाता है। चाणक्य के अनुसार जो लोग अपनी वाणी में मधुरता नहीं रखते वह कभी किसी के साथ सुखी नहीं रह सकते हैं।
अहंकार को करें अलविदा:-
चाणक्य कहते हैं अहंकार आपका सबसे बड़ा दुश्मन है। अगर रिश्ते में अहंकार की भावना जग गई तो यह रिश्ते को तहस नहस कर देती है। रिश्ते में हमेशा शान्त व्यवहार से रहना चाहिए और अहंकार को रिश्ते पर हावी नहीं होने देना चाहिए।
गुस्से पर लगाएं लगाम;-
चाणक्य कहते हैं जो अपने क्रोध पर काबू नहीं पा सकता वह एक अच्छा रिश्ता भी नहीं चला सकता। क्योंकि क्रोध रिश्ते को तोड़ता है और अपनेपन की भावना को खत्म करता है। अगर आप बेवजह अपनो पर क्रोध करते रहते हैं तो आप अकेले हो जाते है और आपका क्रोध आपके रिश्ते को ले डूबता है।
सत्य को दें प्राथमिकता:-
रिश्ते में सत्य का सबसे अधिक महत्व है। अगर रिश्ते में सत्य नहीं रहता है तो वह रिश्ता बेमतलब सा हो जाता है और रिश्ते में साथ रहकर भी लोग एक दूसरे से ईर्ष्या करते रहते हैं।

