UP Election Result: करारी हार के बाद क्या होंगी Mayawati के सामने चुनौतियां और बसपा (BSP) का भविष्य

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UP Election Result: करारी हार के बाद क्या होंगी Mayawati के सामने चुनौतियां और बसपा (BSP) का भविष्य

लखनऊ। UP Election Result| देश की नेशनल पार्टियों में शुमार बहुजन समाज पार्टी (BSP) के सामने अब अस्तित्व बचाने का संकट सामने आ गया है। 2007 के बाद से लगातार पार्टी के प्रदर्शन में गिरावट देखने को मिली है। स्थिति यह है कि यूपी में जहां कभी उसके 207 विधायक हुआ करते थे, उसके पास मात्र एक विधायक बचा है। 30% से ज्यादा वोट शेयर हासिल करने वाली बसपा को 2022 के चुनाव (assembly election 2022) में मात्र 13% ही मत मिले हैं। ऐसे में बसपा के सामने अब कई चुनौतियां हैं। भाजपा और सपा जैसी विरोधी पार्टियां और चंद्रशेखर के उभार के बीच बसपा के सामने चुनौतियों का पहाड़ खड़ा है। ऐसे में मायावती के सामने संगठन को एक बार फिर से मजबूती से खड़ा करना किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं है।

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क्यों कमजोर होती गई बसपा
बसपा के कमजोर होने के पीछे की कई वजहें हैं। इसमें सबसे बड़ी वजह है मायावती की लोगों के बीच की निष्क्रियता। जनता के बीच जाकर अधिकारियों को आदेश देना मायावती की टीआरपी हुआ करती थी। लेकिन, 2007 के बाद मायावती ने धीरे-धीरे कर लोगों के बीच जाना बंद कर दिया। मामला यहां तक बढ़ा कि मायावती (Mayawati) से सिर्फ चुनिंदा लोग ही मिल सकते हैं। आलम यह है कि मायावती अगर किसी नेता पर कार्रवाई करती हैं तो उनका पक्ष भी नहीं सुना जाता है। इसके अलावा टिकट वितरण में पैसे की मांग भी बसपा की सियासी जमीन को कमजोर करती गई। कभी बसपा के टिकट पर बेनाम और गरीब से गरीब लोग चुनकर न सिर्फ सदन में पहुंचे बल्कि मंत्री भी बने। लेकिन, अब यह बातें बसपा के लिए इतिहास बनती जा रहीं हैं। मायावती की नीतियों से खफा होकर लगभग सभी बड़े नेताओं ने पार्टी का दामन छोड़ दिया। यही कारण रहा कि बसपा लगातार कमजोर होती गई।

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अब क्या हैं चुनौतियां
इस सवाल के जवाब में बसपा के एक नेता नाम नहीं छापने की शर्त पर दो टूक कहते हैं कि बसपा के सामने सबसे बड़ी चुनौती खुद मायावती ही हैं। अगर वो सही हो जाएं तो बसपा को बढ़ने से कोई नहीं रोक सकता। वो कहते हैं मायावती को मात्र तीन सुधार करने होंगे, पहला ये कि वो सबसे मिलना-जुलना और उनको सुनना शुरू करें, दूसरा टिकट वितरण में पैसे की डिमांड को कम करें और तीसरा सबसे महत्वपूर्ण जनता के बीच जाएं और आंदोलनों का हिस्सा बनें। अगर यह होता है तो मायावती को कोई नहीं रोक सकता। हालांकि इसके अलावा अब बसपा के सामने चंद्रशेखर भी एक कठिन चुनौती के रूप में उभर सकते हैं। लगातार आंदोलनों का हिस्सा बन रहे चंद्रशेखर दलित युवाओं के बीच गहरी पैठ बनाते जा रहे हैं। इसके अलावा बसपा में वरिष्ठ नेताओं की छत्रपों की कमी है। इस कमी को पूरा करना मायावती के सामने सबसे कठिन चुनौती होगी। इस चुनाव में बसपा के सामने जो कठिन चुनौती बनकर उभरी है वो है भाजपा (BJP) की बी टीम होने का परसेप्शन कायम होना। अब मायातवी के सामने कठिन चुनौती है कि वो जनता खासकर दलितों को यह विश्वास दिलाएं कि वह भाजपा की बी टीम नहीं हैं।

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