मेरठ। तीसरे चरण के चुनाव का मतदान हो गया है। लेकिन पहले और दूसरे चरण की तरह ही भाजपा के लिए ये तीसरा चरण हाल खराब करने वाला बताया जा रहा है। यह भी कहा जा रहा है कि भाजपा को इस चरण में दहाई का आंकड़ा पार करना भी मुश्किल होगा। बता दे कि यादव बेल्ट में इस बार यादवों की एकजुटता मतदान के दौरान देखने को मिली है। कानपुर में भी जमकर सपा के पक्ष में वोट पड़े है। यादव बाहुल्य इलाकों में सबकी निगाह लगी हुई हैं।
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तीसरे चरण में प्रदेश की 59 सीटों के लिए मतदान हुआ है। जानकारों का कहना है कि मानकर चलिए कि यहां पर भी भाजपा का डिब्बा गोल हुआ है और चुनाव के इस तीसरे चरण ने भाजपा की हवा खराब कर दी है। जो मई और जून की गर्मी निकालने की बात कहते थे उनका बुरा हाल है और उनकी गर्मी खुद ही निकली हुई है। इस चुनाव से पांच पहले की बात करें तो उस दौरान यानी 2017 के चुनाव से पहले यादव परिवार के बीच लड़ाई थी। अखिलेश और शिवपाल के बीच लाइन खिंची थी। नतीजा यादव बेल्ट में यादवो के वोट का बिखराव हुआ और भाजपा ने उसी का फायदा उठाते हुए यहां पर सेंधमारी कर दी। यादव परिवार की लड़ाई और उनके मतभेद के कारण ही भाजपा को इस तीसरे चरण में 2017 में 30 से अधिक सीटें मिली थी। लेकिन इस बार हालात बदले हैं। इस यादव बेल्ट में लोग आंख बंदकर नेताजी यानी मुलायम सिंह यादव का समर्थन करते हैं।
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इस बार मुलायम सिंह करहल आए तो यादव मतदाताओं के बीच एक अलग ही संदेश गया। जिसका नतीजा यह हुआ कि यादव वोटबैंक में इस बार बिखराव नहीं हो पाया। करहल से चुनाव लड़कर अखिलेश यादव ने भी यह जता दिया कि सपा की सरकार आती है तो वे ही मुख्यमंत्री बनेंगे। इस बार भाजपा की पूरी टीम उप्र विधानसभा चुनाव में लगी हुई है। भाजपा का मानना है कि यूपी जीतने के बाद 2024 में केंद्र की राह आसान होगी। लेकिन शायद अब यूपी की सत्ता का सपना ही रह जाएगा।

