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IT Rules Fact Check Unit: इंटरनेट पर सेंसरशिप की तैयारी में सरकार, Fact Check Unit पर बवाल ?

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नई दिल्ली। केंद्र की भाजपा सरकार इंटरनेट पर सेंसरशिप की तैयारी में है। ऐसा विपक्ष का आरोप हे। नए आईटी नियम के लागू होने से पहले ही बवाल मचा हुआ है। सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर सक्रिय लोगों ने इसका विरोध करना शुरू कर दिया है। सरकार ने फैसला किया है कि कौन सी पोस्ट या खबर फर्जी या भ्रामक है, इसका फैसला करने के लिए एक निकाय बनाया जाएगा। यह निकाय आईटी मंत्रालय के अंतगर्त होगा। बनाया गया फैक्ट चेक निकाय ऑनलाइन चीजों के केवल उस सामग्री की पड़ताल के लिए जिम्मेदार होगा जो सरकार से संबंधित हैं।

इंटरनेट कंपनियों पर कसेगा शिकंजा

संशोधित नियमों के बाद इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय का शिकंजा इंटरनेट कंपनियों पर कस जाएगा। नए नियम के पीछे सरकार का तर्क है कि इंटरनेट कंपनियां फैक्ट चेकर द्वारा जांच की गई गलत या भ्रामक जानकारी को प्लेटफॉर्म से हटाने में विफल रहती हैं। ऐसे में अपना विशेषाधिकार खो सकती हैं। इस मामले में सरकार के फैसले का विरोध तेज हो गया है। इसको देश में प्रेस की स्वतंत्रता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने वाला बताया जा रहा है। इसने नियमों को कठोर करार देते हुए वापस लेने की मांग की है।

फेक न्यूज को लेकर अभी क्या हुआ

केंद्र सरकार ने सूचना प्रौद्योगिकी नियम, 2021 में संशोधन को अधिसूचित कर दिया। इसके तहत एक निकाय बनाया जाएगा। यह निकाय इंटरनेट कंपनियों जिसमें गूगल, फेसबुक, ट्विटर से लेकर सभी समाचार और गैर-समाचार कंपनियां शामिल हैं शामिल की गई हैं। इन सभी की समाग्रियों की जांच इसके तहत की जाएगी।

भ्रामक खबर और उसके यूआरएल को भी होगा हटाना

अगर निकाय की जांच में पोस्ट या खबर विवादित या भ्रामक होती है तो संबंधित न्यूज पोर्टल या कंपनियों की साइट को उस कंटेंट को हटाना होगा। इसके अलावा ऐसी खबर या पोस्ट का यूआरएल भी हटाना होगा। यदि संबंधित पोर्टल या कंपनी ऐसा करती है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। सोशल मीडिया के मामले में जानकारी डालने वाला यूजर तक इस कार्रवाई के दायरे में आएंगे।

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