Gujarat Chunavi Dangal- गुजरात मे इस साल के अंत मे विधानसभा चुनाव होने को हैं। जहाँ सभी राजनीतिक दल जनता को लुभाने के लिए तरह तरह की रणनीति बना रहे हैं वही अगर हम गुजरात की जातिय राजनीति की बात करे तो यह उत्तरप्रदेश और बिहार से हटके है। यहां खुले तौर पर राजनेता जाति के नाम पर राजनीति कर रहे हैं। उनके राजनीतिक परिदृश्य से स्पष्ट हो रहा है कि गुजरात मे सबसे ज्यादा जातिय राजनीति हो रही है।
गुजरात एक ऐसा राज्य है जहां 80 के दशक से जातिय राजनीति उफान पर है। जब गुजरात का विभाजन हुआ और गुजरात मे पहला चुनाव हुआ तो यहां के राजनीतिक का परिदृश्य जातिय था। वही तब से अब तक गुजरात मे जातिय राजनीति का डंका बज रहा है। प्रत्येक राजनीतिक दल जाति के नाम पर गुजरात मे अपनी विजय पताका लहराना चाहता है। आज गुजरात मे राजनीतिक दल पाटीदार समाज से लेकर मुस्लिम समाज और कोली समाज को लुभाने की कोशिश में लगे हुए हैं।
इसी जातिय राजनीति के बलबूते पर कांग्रेस ने वर्ष 1980 में अपनी जीत दर्ज की। वही इस बार भी गुजरात कांग्रेस जाति के बलबूते पर गुजरात मे अपना 27 साल का वनवास काटना चाह रही है। वही अगर हम गुजरात के सौराष्ट्र की बात करें तो इसे जातिय राजनीति का गढ़ कहा जाता है। क्योंकि सौराष्ट्र से कुल 54 विधायक बनते हैं। यहां का वोट बैंक जाति के नाम पर दिया जाता है। अगर हम वर्ष 2017 की बात करें तो यहां की 54 सींटो में से 30 सींटें कांग्रेस को हासिल हुई। जबकी 24 सींटें भाजपा को हासिल हुई।
