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कांग्रेस की जीत नहीं चाहते थे कैप्टनः रावत


कांग्रेस की जीत नहीं चाहते थे कैप्टनः रावत

देहरादून। पंजाब के मुख्यमंत्री पद पर रहते हुए कैप्टन अमरिंदर सिंह काफी संख्या में विधायकों का विश्वास चुके थे। कांग्रेस विधायकों को लगता था कि उनके सीएम अकालियों से मिले हुए हैं और वह कांग्रेस को जिताना ही नहीं चाहते। सच्चाई सामने होने के बावजूद कैप्टन सच को समझना ही नहीं चाहते थे।

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पंजाब कांग्रेस में हुए विवाद के बाद तत्कालीन सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था। इसके बाद कांग्रेस के खिलाफ बगावती तेवर दिखाने वाले अमरिंदर सिंह ने कांग्रेस छोड़ने का ऐलान कर दिया। पूर्व मुख्यमंत्री ने कांग्रेस नेतृत्व पर भी अनेक सवाल उठाये।

पंजाब प्रभारी राष्ट्रीय महासचिव हरीश रावत ने पंजाब के पूर्व सीएम कैप्टेन अमरिंदर सिंह को लेकर सोशल मीडिया पर पोस्ट डाली है। हरीश रावत ने कहा कि अपनी ही पार्टी के विधायकों का विश्वास खो चुके अमरिंदर सिंह उन्हें मिलने का समय तक नहीं देते थे। पार्टी असंतोष पर काबू पाने के लिये कांग्रेस नेतृत्व ने उन्हें 18 बिंदू सौंपे थे मगर पूर्व सीएम ने उनपर कार्रवाई करने की भी आवश्यकता महसूस नहीं की। हरीश रावत ने कहा कि समय-समय पर विधानमंडल दल की बैठक बुलाकर विचार-विमर्श करना एक मुख्यमंत्री का दायित्व होता है। लेकिन पंजाब में अमरिंदर सिंह ने ऐसा कितनी बार किया यह बात किसी से छिपी नहीं है।

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हरीश रावत ने कहा कि विधायकों को लगने लगा था कि कैप्टन अकालियों से मिले हुए हैं और वह कांग्रेस को जीत दिलाना नहीं चाहते। कांग्रेस नेतृत्व की ओर से उनको समझाने के प्रयास भी बेमानी रहे।

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