अमित बिश्नोई
केपटाउन टेस्ट मैच भारत ने जीत लिया। बड़ी अच्छी बात रही. पर क्या वाकई केपटाउन में जो कुछ भी हुआ अच्छा हुआ. डेढ़ दिन के भीतर, पांच सत्रों के अंदर और सिर्फ 642 गेंदों में टेस्ट मैच समाप्त हो गया. ये टेस्ट मैच था या तमाशा। क्या टेस्ट मैच ऐसे ही खेले जाते हैं, क्या टेस्ट मैच में एक दिन में ढाई पारियाँ समाप्त हो जाती हैं. क्या एक दिन में 23 विकेट गिरना इस खेल के ओरिजिनल फॉर्मेट को गवारा होगा। 1902 में इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया के बीच खेले गए टेस्ट के पहले दिन 25 विकेट गिरे थे. बस वो रिकॉर्ड टूटते टूटते रह गया. सवाल ये है कि इस तरह की क्रिकेट का ज़िम्मेदार कौन है? क्या केप टाउन की पिच इसकी ज़िम्मेदार है. अगर हाँ तो फिर ICC क्या कर रहा है. अगर वर्ल्ड कप फ़ाइनल की पिच खराब घोषित हो सकती है तो फिर ये क्या है? चलिए पिच से पहले कुछ और भी बात करते हैं
जब से टी-20 क्रिकेट का उद्भव हुआ है टेस्ट क्रिकेट का नाश हो रहा है. टी 20 लीग में पैसों की चकाचौंध ने खिलाडियों को अँधा कर दिया है उन्हें अब लाल गेंद अच्छी नहीं लगती. कठोर शब्दों में कहूँ तो उन्हें लाल गेंद दिखाई ही नहीं देती तभी तो पांच सत्रों में मैच ख़त्म हो रहा है। बल्लेबाज़ों में टेस्ट खेलने का टेम्परामेंट ही ख़त्म होता जा रहा है. उनमें न ही धैर्य है और न ही संयम। माना कि पिच खराब थी, अनियमित उछाल था लेकिन टीमें कौन सी खेल रही थीं? भारत और दक्षिण अफ्रीका। भारतीय बल्लेबाज़ी तो अपने आप में बड़ी गहरी मानी जाती है, दक्षिण अफ्रीका भी कोई छोटी टीम नहीं है और जब इन दो बड़ी टीमों के बीच टेस्ट मैच 642 गेंदों ख़त्म हो जाय तो फिर टेस्ट क्रिकेट का भगवान् ही मालिक है.
टेस्ट क्रिकेट से क्रिकेटर्स और क्रिकेट बोर्ड किस तरह सौतेला बर्ताव अपना रहे हैं इसकी ताज़ा मिसाल दक्षिण अफ्रीका है जिसने न्यूज़ीलैण्ड के खिलाफ अपने सभी मुख्य खिलाडियों को न भेजने का फैसला किया है और उसकी वजह ये है साउथ अफ्रीका के वो बड़े खिलाड़ी देश में होने वाली लीग खेलना चाह रहे हैं, उन्होंने टेस्ट क्रिकेट की जगह लीग क्रिकेट को प्राथमिकता दी है और बोर्ड ने मंज़ूरी भी. दक्षिण अफ्रीका के इस रवैये पर न्यूज़ीलैण्ड ने आईसीसी के सामने विरोध भी दर्ज जताया है. लीग क्रिकेट की वजह से अगर इसी तरह विदेशी दौरों पर बी टीमें भेजी जाने लगीं तो आगे टेस्ट क्रिकेट का क्या होगा सिर्फ अंदाज़ा लगाया जा सकता है.
टेस्ट क्रिकेट की उपेक्षा का एक और ताज़ा उदाहरण पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने पेश किया। पाकिस्तान की टीम इन दिनों ऑस्ट्रेलिया के दौरे पर. पहले दो टेस्ट पाकिस्तान हार चुकी है इसके बावजूद उसने मेलबोर्न टेस्ट में अपने इकलौते प्रमुख गेंदबाज़ शाहीन शाह आफरीदी को आराम दिया। आराम देने की वजह जानकार आपको हैरत होगी। शाहीन को आराम इसलिए दिया गया क्योंकि उन्हें न्यूज़ीलैण्ड के खिलाफ टी-20 शृंखला खेलनी है. शाहीन अब पाकिस्तान की टी 20 टीम के कप्तान भी हैं। पाकिस्तान को टेस्ट श्रंखला में 2-0 से पीछे होने का कोई मलाल नहीं है, उसे मेलबोर्न टेस्ट जीत अपना सम्मान बचाने की कोई परवाह नहीं है, उसे परवाह है तो सिर्फ टी 20 श्रंखला की। शाहीन जो इससे पहले रेस्ट की बात पर ही भड़क जाते थे उन्हें भी टेस्ट मैच में रेस्ट करने से अब कोई परहेज़ नहीं है.
आप अगर गौर करें तो सिर्फ भारत, ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड ही टेस्ट मैचों को लेकर संजीदा हैं। वेस्टइंडीज़ का हश्र दुनिया देख ही रही है, फटाफट क्रिकेट के चक्कर में उनके यहाँ से क्रिकेट ही धीरे धीरे गायब हो रही है. वेस्टइंडीज के पास अब सिर्फ लीग वाले क्रिकेटर ही बचे हैं। कभी क्रिकेट की दुनिया पर राज करने वाली वेस्टइंडीज की टीम आज वर्ल्ड कप के क्वालीफाई नहीं कर पाती। दक्षिण अफ्रीका भी अब उसके नक़्शे कदम पर जाती हुई दिख रही है, अगर ऐसे ही वहां लीग क्रिकेट को तरजीह मिलती रही , अगर ऐसे ही वो विदेशी दौरों पर बी टीम भेजती रही तो उसका हश्र भी एकदिन वेस्ट इंडीज जैसा ही होगा।
अब ज़रा बात पिच को लेकर कर लें तो रोहित शर्मा ने मैच के बाद प्रेजेंटेशन में जो कहा वो ICC के मुंह पर करारा तमांचा कहा जा सकता है. रोहित ने कहा कि उन्हें केपटाउन जैसी पिच पर खेलने में कोई ऐतराज़ नहीं मगर फिर भारतीय पिचों के बारे में आपको बोलने और हंगामा करने का कोई अधिकार नहीं। रोहित ने सही कहा कि अगर ये पिच खेलने लायक थी तो फिर भारतीय पिचें इससे लाख गुना बेहतर थीं. हम अगर ईमानदारी से केपटाउन की पिच पर भारतीय बल्लेबाज़ी का आंकलन करेंगे तो पाएंगे कि हमने काफी ठीक बल्लेबाज़ी की. आप कहेंगे कि बिना कोई रन जोड़े 6 विकेट ढेर हो गए तो आपको ये भी देखना होगा कि इस unplayable पिच पर एक समय स्कोर तीन विकेट पर 153 रन भी था जो इस तरह की पिच पर बहुत अच्छा प्रदर्शन कहा जायेगा।
आखिर में ऐसी पिच पर मिली जीत के लिए रोहित सेना को बहुत बहुत बधाई मगर क्रिकेट के संचालकों को सोचना होगा कि ऐसी ही पिचों पर अगर टेस्ट मैच होते रहे तो क्रिकेट से ओरिजिनालिटी का ख़ात्मा हो जायेगा और सिर्फ डुप्लीकेट क्रिकेट ही चलन में रह जायेगी और इसकी ज़िम्मेदार सिर्फ और सिर्फ ICC होगी , इसलिए वो समय आये उससे पहले ही इस तरह के तमाशे बंद होने चाहिए , इसी में क्रिकेट का भला है।