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By-election Results 2022 LIVE Updates: सपा के अभेद्य गढ़ आजम गढ़ और रामपुर में बीजेपी की जीत के मायने

मेरठ। रामपुर और आजम गढ़ लोकसभा चुनाव में बीजेपी की जीत बड़े मायने रखती है। वो भी ऐसे समय जब देश में अग्निपथ योजना, महंगाई और किसान समस्या को लेकर चारों तरफ से सरकार का विरोध हो रहा हो।  बीजेपी के लिए ये जीत बड़े मायने रखती है।रामपुर को सपा नेता आजम खां और आजमगढ़ को मुलायम अखिलेश का गढ़ कहा जाता है। 2019 लोकसभा चुनाव में आजमगढ़ से अखिलेश जीते थे। इसी आजमगढ़ से 2014 में मुलायम सिंह यादव  सांसद बने थे। 2019 के लोकसभा चुनाव में आजम खां रामपुर से सांसद बने थे। लेकिन अब सपा की ये दोनों सीटें भाजपा के खाते में चली गई ।

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आजमगढ़, रामपुर उपचुनाव में भाजपा जीत के बाद कई तरह के सियासी सवाल उठ रहे हैं। सियासी गलियारों में सबसे बड़ा सवाल है कि आखिर भाजपा ने अखिलेश यादव और आजम के गढ़ में कैसे सेंध लगाई? आजमगढ़ उपचुनाव में भाजपा ने भोजपुरी गायक दिनेश लाल यादव उर्फ निरहुआ पर उपचुनाव में भी भरोसा जताया। 2019 में निरहुआ इस सीट से चुनाव लड़े, लेकिन अखिलेश यादव से हार गए। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने बड़े अंतर से बीजेपी प्रत्याशी को हराया था। विधानसभा चुनाव जीतने के बाद अखिलेश ने आजमगढ़  लोकसभा सीट छोड़ दी। उपचुनाव में अखिलेश ने अपने भाई धर्मेंद्र यादव को उम्मीदवार बनाया। हालांकि, धर्मेंद्र अखिलेश की जीत बरकरार रखने में नाकाम रहे और चुनाव हार गए।

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ऐसा ही दाव बीजेपी ने रामपुर में खेला । रामपुर उपचुनाव में भाजपा ने घनश्याम लोधी को उम्मीदवार बनाया। घनश्याम कभी सपा नेता आजम के काफी करीबी रहे थे। घनश्याम सपा से एमएलसी भी रह चुके हैं। घनश्याम लोधी ने 2022 विधानसभा चुनाव से पहले सपा का दामन छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया था। उसके बाद से ही पार्टी से टिकट पाने की कोशिश में थे, लेकिन नहीं मिला। आजम खां के  सीट छोड़ने पर उपचुनाव में भाजपा ने घनश्याम को उम्मीदवार बना दिया। दूसरी तरफ सपा ने आजम के करीबी आसिम रजा को मैदान में उतार दिया। जेल से बाहर आने के बाद आजम खां ने सपा प्रत्याशी आसिम का जमकर प्रचार किया। लेकिन सब बेकार हो गया। दोनों सीट सपा से छीनने के बाद जहाँ लोकसभा में बीजेपी का बहुमत बढ़ा है वहीं पार्टी का आत्मविश्वास भी।

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