पीपीई किट उतारकर श्मशान घाट में ही डाल देते हैं लोग
श्मशान घाट में आने वालों के संक्रमित होने की आशंका
सुनील शर्मा
मेरठ। सूरजकुंड श्मशान घाट पर कोरोना संक्रमित के शव का अंतिम संस्कामर करने के बाद अधिकतर लोग पहनी पीपीई किट और हैंड ग्लशव्जे वहीं छोड़ जाते हैं। ऐसे में सूरजकुंड श्मशान घाट पर चारों ओर बिखरीं पीपीई किट और हैंड ग्लव्स के कारण यहां आने वालों लोगों के कोरोना संक्रमित होने का खतरा मंडरा रहा हैा लेकिन अभी तक स्वास्थ्य विभाग या श्मशान घाट प्रबंधन का ध्यान इस ओर नहीं जा रहा है।
गौरतलब है कि मेरठ में कोरोना संक्रमण से जान गवा देने वाले अधिकतर मरीजों के शव का अंतिम संस्कार सूरजकुंड श्मशान घाट पर किया जाता है। यहां पर कोरोना संक्रमितों के शव का अंतिम संस्कार का आंकड़ा बढ़ते जाने के बाद यहां अतिरिक्त अंतिम संस्कार प्लेटफार्म भी बनाने पड़े।
कोरोना संक्रमितों का अंतिम संस्कार करने वाले और शव को श्मंशान घाट तक लाने वाले अधिकतर लोग पीपीई किट पहने हुए होते हैं। मगर अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरा होते ही यह लोग पीपीई किट उतारकर श्मशान घाट में ही डाल देते हैं।कोरोना संक्रमितों के शव के संपर्क में आई पीपीई किट और हैंड ग्लव्स के भी संक्रमित होने की संभावना काफी अधिक रहती है। ऐसे में पीपीई किट और हैंड ग्लव्स को इस तरह खुले में फेंके जाने से कोरोना संक्रमण का प्रसार होने और श्मशान घाट में आने वालों के संक्रमित होने की आशंका बनी रहती है।
ऐसा नहीं कि खुले में पड़ी पीपीई किट या हैंड ग्लहव्जा किसी की निगाह में ना आए हों, मगर श्मशान घाट प्रबंधन से लेकर स्वास्थ्य विभाग तक इस मामले में उचित कदम उठाने को तैयार नहीं है। पीपीई किट और ग्लाव्जह के निस्तारण की व्यवस्था भी श्मशान घाट में की जानी चाहिए ताकि इनके संपर्क में आने से कोई और व्यक्ति कोरोना संक्रमित ना होने पाए। इनके लिए अलग से और खास तरह के बॉक्स बनाए जा सकते हैं जिनमें डाले जाने के बाद संक्रमण का प्रसार होना संभव ना हो।
