जीएसटी परिषद की मीटिंग में क्षतिपूर्ति पर नहीं बनी सहमति

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जीएसटी परिषद की मीटिंग में क्षतिपूर्ति पर नहीं बनी सहमति

आज रात राज्यों को बांटे जायेंगे बीस हज़ार करोड़ रूपये

नयी दिल्ली: जीएसटी परिषद की सोमवार को हुई महत्वपूर्ण बैठक में राज्यों को क्षतिपूर्ति दिये जाने के मामले में कोई आम सहमति नहीं बन पायी। परिषद क्षतिपूर्ति के लिये कर्ज लेने के उपाय पर राजनीतिक विचारों के आधार पर बटी दिखी। समिति की काफी देर तक चली बैठक के बाद वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि 21 राज्यों ने केंद्र के सुझाये दो विकल्पों में से एक का चयन किया है। लेकिन कुछ राज्यों ने दोनों विकल्पों में से किसी का भी चयन नहीं किया। इसको देखते हुए परिषद की इस बारे में आगे और विचार-विमर्श को लेकर 12 अक्टूबर को फिर बैठक होगी।

आज रात जारी होंगे 20,000 करोड़ रुपये
42वीं GST काउंसिल मीटिंग में केंद्रीय मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि इस साल 20,000 करोड़ रुपये कंपनसेशन सेस इकट्ठा किया गया है जिसे आज रात राज्यों को बांटा जाएगा। 24,000 करोड़ रुपये का IGST अगले सप्ताह के अंत तक राज्यों को बांट दिया जाएगा।

RBI से क़र्ज़ लेने का विकल्प
उल्लेखनीय है कि केंद्र ने राज्यों को जीएसटी संग्रह में कमी की भरपाई के लिए बाजार से या फिर रिजर्व बैंक से कर्ज लेने का विकल्प दिया है। केंद्र के अनुमान के अनुसार चालू वित्त वर्ष में राज्यों को माल एवं सेवा कर (जीएसटी) संग्रह में 2.35 करोड़ रुपये के राजस्व की कमी का अनुमान है। केंद्र के आकलन के अनुसार करीब 97,000 करोड़ रुपये की कमी जीएसटी क्रियान्वयन के कारण है, जबकि शेष 1.38 लाख करोड़ रुपये के नुकसान की वजह कोविड-19 है।

केंद्र ने दिए थे दो विकल्प
इस महामारी के कारण राज्यों के राजस्व पर प्रतिकूल असर पड़ा है। केंद्र ने इस कमी को पूरा करने राज्यों को दो विकल्प दिये हैं। इसके तहत 97,000 करोड़ रुपये रिजर्व बैंक द्वारा उपलब्ध करायी जाने वाली विशेष सुविधा से या पूरा 2.35 लाख करोड़ रुपये बाजार से लेने का विकल्प दिया गया है।

जून 2022 थी समय सीमा
सीतारमण ने यह भी कहा कि क्षतिपूर्ति उपकर से प्राप्त 20,000 करोड़ रुपये का वितरण राज्यों के बीच किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जीएसटी परिषद ने जून 2022 के बाद भी जीएसटी उपकर जारी रखने का निर्णय किया है। पहले जीएसटी उपकर लगाये जाने की समयसीमा जून 2022 थी।

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