शैंपेन,स्काच ​व्हिस्की के जीआई टैग से यूरोप प्रतिवर्ष कमाता है 75 अरब यूरो,जानिए क्या GI Tag

 
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नई दिल्ली। जीआइ टैग देश की की सामाजिक-आर्थिक स्थिति में सुधार ला सकते हैं। एक आंकड़ों के अनुसार यूरोप शैंपेन, स्काच व्हिस्की आदि के जीआई टैग उत्पादों से प्रतिवर्ष 75 अरब यूरो की कमाई करता है। विश्व में सबसे अधिक जीआई टैग जर्मन के पास हैं। जर्मन के पास सर्वाधिक 15,566 जीआइ टैग हैं। इसके बाद सबसे अधिक जीआई टैग 

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सात हजार चीन के पास हैं। हंगरी के पास 6683 जीआई टैग हैं। छह हजार से अधिक जीआई टैग चेक रिपब्लिक,इटली,पुर्तगाल,बुल्गारिया के पास हैं। भारत के पास 419 जीआइ टैग हैं। इसमें से सबसे अधिक 120 कृषि उत्पाद हैं। 
जीआइ टैगिंग विशेष क्षेत्र के प्राकृतिक,कृत्रिम रूप से बने उत्पाद या विशेष फसल के लिए दिया जाता है। यह उत्पाद की भौगोलिक पहचान को स्थापित करता है। भारत में इसके लिए 1999 में एक अधिनियम बनाया गया था। चेन्नई स्थित पेटेंट, डिजाइन और ट्रेडमार्क महानियंत्रक कार्यालय में जीआई टैग के लिए आवेदन होता है।

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वैश्विक स्तर पर वर्ल्ड इंटेलेक्चुअल प्रापर्टी आर्गेनाइजेशन की ओर से जीआइ टैग जारी होता है। उत्पाद को जीआई टैग मिलने champagne, scotch के बाद उसका मूल्य बढ़ जाता है। इसके बाद कोई दूसरा देश या संस्थान इस नाम से कोई प्रोडेक्ट को नहीं बेच सकता। जीआइ टैग मिलने का कोई समय निर्धारित समय नहीं होता है। यह इस बात पर निर्भर होता है कि इसके कागजी दस्तावेज कितने प्रमाणित हैं। जीआई टैग के लिए कम से कम छह महीने से दो साल का समय लगता है।