नयी दिल्ली: आर्थिक समीक्षा में 2020-21 वित्त वर्ष में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर में 7.7 प्रतिशत गिरावट का अनुमान व्यक्त करते हुए कहा गया है कि इससे अगले वित्त वर्ष 2021-22 में देश की वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 11 प्रतिशत और सांकेतिक जीडीपी वृद्धि दर 15.4 प्रतिशत रहेगी, जो देश की आजादी के बाद सर्वाधिक है।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को संसद में आर्थिक समीक्षा 2020-21 पेश करते हुए कहा कि वित्त वर्ष 2020-21 में भारत की जीडीपी वृद्धि दर 7.7 प्रतिशत ऋणात्मक रहने का अनुमान है। प्रथम छमाही में जीडीपी में 15.7 प्रतिशत की तेज गिरावट और दूसरी छमाही में 0.1 प्रतिशत की अत्यंत कम गिरावट को देखते हुए ही यह अनुमान लगाया गया है। विभिन्न क्षेत्रों पर नजर डालने पर यही पता चलता है कि कृषि क्षेत्र अब भी आशा की किरण है, जबकि लोगों के आपसी संपर्क वाली सेवाओं, विनिर्माण और निर्माण क्षेत्र बुरी तरह प्रभावित हुए थे जिनमें धीरे-धीरे सुधार देखा जा रहा हैं। सरकारी उपभोग और शुद्ध निर्यात के बल पर ही आर्थिक विकास में और ज्यादा गिरावट देखने को नहीं मिल रही है। लॉकडाउन के कारण प्रथम तिमाही में जीडीपी में 23.9 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई। वहीं, बाद में ‘वी’ आकार में वृद्धि यानी निरंतर अच्छी बढ़ोतरी देखने को मिल रही है।
उन्होंने कहा कि महामारी के प्रकोप के बाद बढ़ती गतिशीलता पर ध्यान देने पर यह पता चलता है कि विभिन्न संकेतक जैसे कि ई-वे बिल, रेल माल भाड़ा, जीएसटी संग्रह और बिजली की मांग बढ़कर न केवल महामारी पूर्व स्तरों पर पहुंच गई है, बल्कि पिछले वर्ष के स्तरों को भी पार कर गई है। राज्य के भीतर और एक राज्य से दूसरे राज्य में आवाजाही को फिर से चालू कर देने और रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गए मासिक जीएसटी संग्रह से यह पता चलता है कि देश में औद्योगिक एवं वाणिज्यिक गतिविधियों को उन्मुक्त कर दिया गया है।
आर्थिक समीक्षा के अनुसार वित्त वर्ष 2021-22 में भारत की वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 11 प्रतिशत और सांकेतिक जीडीपी वृद्धि दर 15.4 प्रतिशत रहेगी, जो देश की आजादी के बाद सर्वाधिक है। व्यापक टीकाकरण अभियान, सेवा क्षेत्र में तेजी से हो रही बेहतरी और उपभोग एवं निवेश में त्वरित वृद्धि की संभावनाओं की बदौलत देश में ‘वी’ आकार में आर्थिक विकास संभव होगा। देश के बुनियादी आर्थिक तत्व अब भी मजबूत हैं क्योंकि लॉकडाउन को क्रमिक रूप से हटाने के साथ-साथ आत्मनिर्भर भारत मिशन के जरिए दी जा रही आवश्यक सहायता के बल पर अर्थव्यवस्था बड़ी मजबूती के साथ बेहतरी के मार्ग पर अग्रसर हो गई है। आईएमएफ के अनुसार भारत अगले दो वर्षों में सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था बन जाएगा।

