कोविड-19 संकट के चलते इंश्योरेंस पॉलिसियों की अंडरराइटिंग में टेक्नोलॉजी का महत्व सामने आया है। वर्तमान परिस्थितियों में इंश्योरेंस कंपनियों को अपने उपभोक्ताओं के लिए इंश्योरेंस पॉलिसी जारी करने के लिए टेलीमेडिकल एक तेज और सुरक्षित तरीका साबित हुआ है।
कोविड-19 या नोवल कोरोना वायरस से संक्रमित होने के खतरे के कारण उन सभी लोगों के पास पर्याप्त लाइफ इंश्योरेंस होना महत्वपूर्ण है, जिनका परिवार उन पर वित्तीय रूप से निर्भर है। सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने और लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी जारी करने से पहले जरूरी मेडिकल टेस्ट के लिए उपभोक्ताओं को घर से बाहर ना निकलना पड़े, इसके लिए इंश्योरेंस कंपनियों ने नियमों में ढील दी है। मेडिकल टेस्ट पर निर्भर रहने की बजाय उन्होंने वैकल्पिक तरीकों से ग्राहक का आकलन शुरु कर दिया है। आमतौर पर, इंश्योरेंस कंपनी का प्रतिनिधि इंश्योरेंस आवेदक के घर आवश्यक मेडिकल टेस्ट के लिए ब्लड सैम्पल कलेक्ट करने के लिए आता है। वैद्यनाथन रमनी, हेड – प्रोडक्ट एंड इनोवेशन्स, पॉलिसीबाज़ार.कॉम ने बताया देश भर में लॉकडाउन के दौरान, बीमा कंपनियों ने उपभोक्ताओं के क्रेडिट स्कोर, टेली-अंडरराइटिंग का उपयोग या खुद आवेदक द्वारा हेल्थ डिक्लेयरेशन के आधार पर पॉलिसी जारी करने का वैकल्पिक तरीका अपनाया है।
वैद्यनाथन रमनी, हेड – प्रोडक्ट एंड इनोवेशन्स, पॉलिसीबाज़ार.कॉम ने कहा जब से लॉकडाउन लागू हुआ है, मेडिकल टेस्ट कराने की बजाय, लाइफ इंश्योरेंस कंपनियों ने टेली-अंडरराइटिंग का उपयोग शुरू किया है। इसके तहत, इंश्योरेंस कंपनी की ओर से एक डॉक्टर इंश्योरेंस आवेदक की वर्तमान मेडिकल हिस्ट्री और स्थिति को जानने के लिए कॉल करता है। लॉकडाउन लागू होने से पहले भी, कुछ कंपनियां टेली-अंडरराइटिंग जैसी आकलन विधियों का उपयोग कर लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसियां जारी कर रही थीं, लेकिन इसमें केवल बेहद कम जोखिम वाले प्रोडक्ट ही शामिल थे। लाइफ इंश्योरेंस इंडस्ट्री में कम सम एश्योर्ड वाली पॉलिसयों को कम जोखिम वाला प्रोडक्ट माना जाता है क्योंकि इनमें क्लेम राशि सीमित होती है। लॉकडाउन अवधि के दौरान, बीमा कंपनियों ने इस तरह के नियमों को हटाने का निर्णय लिया। जिन कंपनियों ने आकलन के लिए वैकल्पिक तरीकों को नहीं अपनाया था, वह अब थर्ड-पार्टी एडमिनिस्ट्रेटर (टीपीए) के साथ गठजोड़ कर रहे हैं ताकि ऑनलाइन पॉलिसी की पेशकश के जरिये अधिक से अधिक लोगों को इंश्योरेंस कवर के दायरे में लाया जा सके।
टेलीमेडिकल- इंश्योरेंस खरीदारी को बनाया आसान
टेलीमेडिकल के जरिये लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी जारी करना बहुत ही सफल रहा है। लॉकडाउन अवधि के दौरान, इंश्योरेंस के लिए भारत के सबसे बड़े ऑनलाइन मार्केटप्लेस PolicyBazaar.com ने अपनी कुल जारी की गई पॉलिसियों में से 58 प्रतिशत को टेलीमेडिकल के माध्यम से जारी किया है। कोविड-19 से पहले यह इंश्योरेंस एग्रीगेटर पोर्टल अपनी 36 प्रतिशत लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसियों को टेली-मेडिकल के माध्यम से जारी करता था। औसत रूप से, पॉलिसीबाज़ार प्रति माह 28,000 लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसियां जारी कर रही है। इसमें से 90 प्रतिशत पॉलिसियां टेलीमेडिकल के माध्यम से बेची जा रही हैं। ग्राहकों द्वारा सबसे ज्यादा 50 लाख और 1 करोड़ रुपए की सम एश्योर्ड वाली पॉलिसियां खरीदी जा रही हैं। टेलीमेडिकल नियम व शर्तों के मुताबिक, टेलीमेडिकल के जरिये अधिकतम 2 करोड़ रुपए के सम एश्योर्ड वाली पॉलिसी खरीदी जा सकती है। आमतौर पर, टेलीमेडिकल ग्रेड्स के मुताबिक, 40 साल की उम्र तक के लोग 2 करोड़ रुपए के सम एश्योर्ड के साथ एक टर्म प्लान खरीद सकते हैं। 40 से 50 वर्ष की आयु वाले लोग अधिकतम 1.5 करोड़ रुपए के सम एश्योर्ड वाले टर्म प्लान को खरीद सकते हैं। 45 से 50 वर्ष की उम्र वाले उपभोक्त अधिकतम 1 करोड़ रुपए के सम एश्योर्ड के साथ टर्म प्लान ले सकते हैं।
टेलीमेडिकल के माध्यम से कैसे खरीदी जा सकती है पॉलिसी
टेलीमेडिकल के माध्यम से टर्म प्लान खरीदने के लिए एक वेतनभोगी व्यक्ति की वार्षिक सीटीसी 5 लाख रुपए होना जरूरी है। वहीं स्व-रोजगार वाले व्यक्ति की आय 10 लाख वार्षिक होना आवश्यक है। सबसे महत्वपूर्ण, टेलीमेडिकल के जरिये टर्म प्लान खरीदने के लिए ग्रेजुएट या इससे अधिक की डिग्री होना आवश्यक है। टेलीमेडिकल प्रक्रिया पूरी तरह से आईआरडीएआई द्वारा नियमित है और उपभोक्ताओं के दृष्टिकोण से यह पूरी तरह सुरक्षित है।
टेलीमेडिकल के अलावा, कुछ कंपनियां टर्म प्लान के लिए उपभोक्ता के क्रेडिट स्कोर और वार्षिक आय को भी देखती हैं। यह जानकारी क्रेडिट ब्यूरो द्वारा उपलब्ध कराई जाती है और एक टर्म प्लान जारी करने से पहले जोखिम का मूल्याकंन करने में यह एक प्रभावी टूल है। टर्म लाइफ प्लान भुगतान किए गए प्रीमियम के लगभग 1000 गुना तक का कवर प्रदान करता है। एक स्वस्थ 30 साल के व्यक्ति को 10,000 रुपए से लेकर 1 करोड़ रुपए तक का कवर मिल सकता है। इसलिए जोखिम का सही आकंलन करना बहुत जरूरी है।
यह आश्चर्यचकित करने वाला है कि इंश्योरेंस इंडस्ट्री टेलीमेडिकल और क्रेडिट ब्यूरो जांच के माध्यम से अब बिना ग्राहक से प्रत्यक्ष मिले ही जोखिम का मूल्याकंन करने के लिए विकसित हो चुका है, जो समय की जरूरत भी है। सभी प्रमुख टर्म लाइफ इंश्योरेंस कंपनियां ऑनलाइन डिस्ट्रिब्यूशन चैनल के साथ भागीदारी में टेलीमेडिकल के जरिये पॉलिसियां उपलब्ध करवा रही हैं।

