नई दिल्ली: सीमा पर झड़प के बाद भारत चीन को बड़ा आर्थिक झटका देने की तैयारी में है और इसके तहत चीनी कंपनियों को दिए गए प्रोजेक्ट रद्द किए जा सकते हैं। केंद्र सरकार की तरफ से बनने वाले दिल्ली-मेरठ सेमी हाई स्पीड रेल कॉरिडोर का ठेका एक चीनी कंपनी को मिला है, जिसे सीमा पर विवाद बढ़ने के बाद सरकार रद्द कर सकती है। इस पूरी योजना को एक चीनी कंपनी शंघाई टनल इंजीनियरिंग कंपनी लिमिटेड (STEC) 1126 करोड़ रुपये की बोली लगाकर हासिल की थी।
स्वदेशी जागरण मंच ने खोला मोर्चा
बता दें कि चीनी कंपनी को यह प्रोजेक्ट दिए जाने का विरोध विपक्ष तो कर ही रहा है, साथ में आरएसएस से जुड़े स्वदेशी जागरण मंच (एसजेएम) ने नरेंद्र मोदी सरकार से वित्तीय बोली को रद्द करने की मांग की है। एसजेएम के राष्ट्रीय सह-संयोजक अश्वनी महाजन ने बताया कि उन्होंने सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी से चीनी कंपनी की बोली को रद्द करने का अनुरोध किया है।
पिछले साल प्रोजेक्ट को मिली थी मंज़ूरी
सरकार ने पिछले साल फरवरी में दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (RRTS) को मंजूरी दी थी। 82.15 किलोमीटर लंबे आरआरटीएस में 68.03 किलोमीटर हिस्सा एलिवेटेड है और 14.12 किलोमीटर हिस्सा अंडरग्राउंड बनना है।

