Sugar exports: चीनी की बढ़ती कीमतों पर नियंत्रण के लिए सरकार इसके निर्यात पर प्रतिबंध लगा सकती है। इस बार महाराष्ट्र और कर्नाटक के गन्ना उत्पादक जिलों में मानसून बारिश अब तक औसत से 50 प्रतिशत कम हुई है। देश में दोनों राज्य कुल चीनी उत्पादन में 50 प्रतिशत तक योगदान देते हैं। इस बार देश में चीनी का उत्पादन 3.30 प्रतिशत गिरकर 3.17 करोड़ टन रहने की उम्मीद है।
भारत अगर चीनी निर्यात पर प्रतिबंध लगाता है तो यह सात साल में पहली बार ऐसा होगा। जब भारत चीनी निर्यात पर प्रतिबंध लगाएगा। यह फैसला अक्तूबर से शुरू होने वाले चीनी सीजन में लिया जा सकता है। बारिश कम होने से गन्ने की फसल घटने का अनुमान है। सरकार चीनी की कीमतों को नियंत्रण में रखने के लिए यह फैसला ले सकती है। 2016 में सरकार ने चीनी निर्यात पर 20 प्रतिशत का कर लगा दिया था।
माना जाता है कि वैश्विक बाजार में भारत से चीनी नहीं पहुंचने से न्यूयॉर्क और लंदन में चीनी की कीमतें बढ़ेगी। पहले से चीनी की कीमतों में तेजी है। यह कई साल की ऊंचाई पर पहुंच गई हैं। चीनी की कीमतें और बढ़ने से वैश्विक खाद्य बाजार में महंगाई बढ़ेगी। सरकारी सूत्रों के मुताबिक सरकार का जोर प्रमुख रूप से चीनी की जरूरतें पूरी करने पर है। गन्ने से सरकार एथेनॉल का उत्पादन करेगी। इस सीजन में 30 सितंबर तक चीनी मिलों को केवल 61 लाख टन चीनी निर्यात करने की अनुमति दी थी। पिछले साल 1.11 करोड़ टन निर्यात की मंजूरी दी गई थी।
महाराष्ट्र और कर्नाटक के प्रमुख गन्ना उत्पादक जिलों में इस बार मानसून की बारिश अब तक औसत से 50 प्रतिशत तक कम हुई है। देश में ये दोनों राज्य कुल चीनी उत्पादन में 50 प्रतिशत तक योगदान करते हैं।
चीनी की कीमतें दो साल के शीर्ष पर
इस हफ्ते स्थानीय बाजार में चीनी की कीमत दो साल में उच्चतम स्तर पर पहुंच गईं है। इससे सरकार को मिलों को अगस्त में अतिरिक्त 200,000 टन बेचने की अनुमति दी गई है। खुदरा महंगाई दर जुलाई में 15 माह के उच्च स्तर 7.44 प्रतिशत पर पहुंच गई थी। खाद्य महंगाई 11.5 प्रतिशत पर पहुंच गई थी जो तीन साल का उच्च स्तर है।

