नयी दिल्ली: मुख्य आर्थिक सलाहकार केवी सुब्रमण्यन ने निजी क्षेत्र की अगुवाई में बैड बैंक की स्थापना की वकालत की है। उन्होंने कहा है कि प्रभावी तरीके से गैर-निष्पादित आस्तियों की समस्या से निपटने के लिए बैड बैंक जरूरी है।
इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष ने 2021 में भारत की आर्थिक वृद्धि दर 11.5 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है। इस मामले में भारत के मुख्य आर्थिक सलाहकार केवी सुब्रमण्यम ने भी आजतक से खास बातचीत में माना है कि भारत की आर्थिक वृद्धि दर 11 फीसदी के करीब रहेगी।
उन्होंने कहा कि कोरोना वायरस महामारी के बीच बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में भारत एकमात्र देश है जिसकी आर्थिक वृद्धि दर इस साल दहाई अंक में होगी।
इसके अलावा, माना जा रहा है कि कोविड-19 की वजह से रिजर्व बैंक ने जो नियामकीय छूट दी हैं, उन्हें वापस लिए जाने के बाद बैंकों के डूबे कर्ज में बड़ा इजाफा हो सकता है। सरकार काफी समय से बैड बैंक के प्रस्ताव पर विचार कर रही है।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण सोमवार को लोकसभा में बजट 2021-22 में इसको लेकर कुछ कदमों की घोषणा कर सकती हैं। बैड बैंक से आशय ऐसे वित्तीय संस्थान से है, जो ऋणदाताओं के डूबे कर्ज को लेगा और समाधान की प्रक्रिया आगे बढ़ाएगा।
ऋणदाता काफी समय से बैड बैंक की स्थापना की मांग कर रहे हैं, जिससे इस कठिन समय में उनका डूबे कर्ज का दबाव कुछ कम हो सके। सुब्रमण्यन ने कहा, ‘‘बैड बैंक के गठन से निश्चित रूप से कुछ एनपीए के एकीकरण में मदद मिलेगी।
यह भी महत्वपूर्ण है कि बैड बैंक का क्रियान्वयन निजी क्षेत्र में करने पर विचार हो। इससे निर्णय की प्रक्रिया तेज हो सकेगी।’’ सार्वजनिक क्षेत्र में डूबे कर्ज के समाधान में ‘तीन सी’ की वजह से देरी होती है। तीन सी से तात्पर्य केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई), केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) और नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) से है।
सीईए ने कहा, ‘‘इस समय बैड बैंक के विचार की जरूरत है। लेकिन इसे अधिक प्रभावी बनाने के लिए इसकी डिजाइनिंग निजी क्षेत्र में होनी चाहिए।’’ आर्थिक समीक्षा-2017 में सबसे पहले यह विचार आया था। समीक्षा में सार्वजनिक क्षेत्र संपत्ति पुनर्वास एजेंसी (पारा) के नाम से बैड बैंक का प्रस्ताव किया गया था।

