लखनऊ। यूपी चुनाव में मिली करारी हार के बाद मायावती एक बार फिर से संगठन को तैयार करने की कोशिशों में जुटी हुईं हैं। इस बीच दावा किया जा रहा है कि कई बड़े नेताओं से संपर्क साधा गया है। बहुत जल्द ही औपचारिक ऐलान के बाद उन्हें पार्टी में शामिल कर लिया जाएगा। सूत्रों का दावा यहां तक है कि मायावती से भी कई नेताओं की बैठकें हो चुकीं हैं। इसमें सबसे पहला नाम पूर्व कैबिनेट मंत्री और मायावती के खास सिपहसालारों में रहे नसीमुद्दीन सिद्दीकी का नाम आया है। हालांकि उन्होंने बसपा में वापसी की कोशिशों को सिरे से खारिज कर दिया है। वहीं जन अधिकारी पार्टी के मुखिया और बसपा सरकार में कद्दावर मंत्री रहे बाबू सिंह कुशवाहा का भी नाम सामने आया है। लेकिन, डेली इनसाइडर से बातचीत में उन्होंने भी मना किया है। इसके बाद भी पार्टी के एक राज्य स्तर के पदाधिकारी ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया है कि भविष्य में कई नेताओं की वापसी होगी, बस समय का इंतजार किया जा रहा है। हालांकि उन्होंने किसी का भी नाम नहीं लिया लेकिन इशारों में बता दिया कि हर उस नेता की वापसी होगी जो बसपा को एक बार फिर से नये सिरे से खड़े होते देखना चाहते हैं।
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बसपा पुराने फॉर्मूले पर फिर आयेगी
बसपा मुखिया मायावती (BSP chief Mayawati) ने साफ कर दिया है कि इस बार वो दलित मुस्लिम गठजोड़ पर काम करेंगी। गौरतलब है कि मायावती ने दलित-ब्राह्मण गठजोड़ एक बार फिर से साकार करने की कोशिश की थी लेकिन नाकामयाब हुई थीं। मायावती को यह अंदाजा हो गया है कि ब्राह्मण अब बीजेपी को छोड़कर नहीं जाएंगे लेकिन मुस्लिम बीजेपी को हराने के लिए बसपा के साथ आ सकते हैं। मायावती इस फॉर्मूले पर काम करेंगी। आजमगढ़ लोकसभा उपचुनाव में गुड्डू जमाली को उतारकर अपने इरादे साफ कर दिये हैं।
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पुराने नेताओं की वापसी से मजबूत हो सकती है बसपा
मायावती ने कई बड़े नेताओं को एक के बाद एक बसपा से बाहर का रास्ता दिखा दिया। उसमें कई नेता आज भी दूसरी पार्टियों में नहीं गये। इतना ही नहीं कई गये भी तो उन्हें वहां पर उतनी तरजीह नहीं मिली। इन सबके बीच बसपा की कोशिश है कि ऐसे नेताओं को एक बार फिर वापस लाया जाए और दलित-मुस्लिम और अतिपिछड़े गठजोड़ को जमीनी स्तर पर उतारा जा सके। इसके लिए मायावती लगातार बैठकें कर रहीं हैं। जल्द ही इन नेताओं की वापसी भी कराई जाएगी।

