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सोशल इंजीन्यरिंग के सहारे बसपा देख रही है 2022 में सत्ता वापसी के ख्वाब


सोशल इंजीन्यरिंग के सहारे बसपा देख रही है 2022 में सत्ता वापसी के ख्वाब

लखनऊ: बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने लोक सभा चुनाव 2019 में 10 सीटों के रूप में मिली राजनीतिक संजीवनी के बल पर उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव 2022 में फिर सत्ता पर काबिज होने के सपने देखने शुरू कर दिये थे। इसी क्रम में Bahujan Samaj Party (BSP) सुप्रीमों मायवाती (Mayawati) ने चुनाव पश्चात ही समाजवादी पार्टी (सपा) से महागठबंधन तोड़कर ये साफ संकेत भी दे दिया था कि उनकी नजर 2022 यूपी विधान सभा चुनावों पर है। हालांकि उसके बाद से उनकी पार्टी और संगठन के कई दिग्गज नेता या तो पार्टी छोड़ते चले गए या फिर उन्हे पार्टी विरोधी गतिविधियों के नाम पर बाहर का रास्ता दिखा दिया गया, जिससे पार्टी धरातल पर कमजोर होती चली गयी हैं।  

यूपी चुनाव से पहले मायावती ने फिर चला अपना हिट सोशल इंजीन्यरिंग दांव

हालांकि मायावती ने यूपी विधान सभा चुनाव 2022 के लिए एक बार फिर से अपने आजमाए हुए ट्रम्प कार्ड यानि सोशल इंजीन्यरिंग Social Engineering फार्मूले पर दांव लगाया हैं। यूपी विधान सभा चुनाव 2022 में अब मात्र 5 महीने का समय शेष बचा हैं तथा सूबे की सभी पार्टियों ने अपने-अपने राजनीतिक दांव चलने शुरू कर दिये है। बसपा प्रमुख मायावती ने भी 2007 के हिट सोशल इंजीन्यरिंग फार्मूले को अपनाने का फैसला करते हुए सर्व समाज के साथ मुस्लिम, दलित व अपने कोर वोटर पिछड़े वोट बैंक को साधने में जुट गयी है।

भाजपा भी यूपी से अपनी सत्ता जाते हुए देखकर घबड़ा गई है : मायावती

बता दे कि BSP को 2007 उत्तर प्रदेश विधान सभा में 206 सीटे मिली थी और 30.43% पड़े थे, वहीं 2017 में उसे 19 सीटे और 22% वोट मिले थे जबकि लोक सभा चुनाव 2019 मे पार्टी को प्रदेश में समाजवादी पार्टी (सपा) SP से महागठबंधन के बावजूद मात्र 10 सीटों से संतोष करना पड़ा था जबकि उसके वोट पर्सेंटेज में कोई खास बदलाव नहीं आया था और वो 20 फीसदी वोट शेयर पर यथावत था।

मायावती और उसके रणनीतिकारों ने शायद इसलिए ही अपने वोट बैंक को बढ़ाने और भाजपा (BJP) के साथ 2014 से खड़े लगभग 40% फीसदी वोटबैंक में सेंध लगाने की दृष्टि से प्रदेश मे “ब्राह्मण सम्मेलन” के माध्यम से प्रबुध वर्ग को अपनी तरफ साधने का प्रयास किया हैं। गौरतलब हैं कि उत्तर प्रदेश के लगभग 13 फीसदी ब्राह्मण वोटरों को साधने के लिए सूबे कि सभी प्रमुख विपक्षी पार्टियो ने ये narrative सेट किया हैं कि योगी आदित्यनाथ के नेत्रत्व वाली भाजपा सरकार ने यूपी में ब्राह्मणों के साथ भेदभाव किया हैं जिसके परिणामस्वरूप ब्राह्मण यानि प्रबुध वर्ग बीजेपी से नाराज हैं। हालांकि भाजपा अयोध्या में राम मंदिर निर्माण की प्रगति और राष्ट्रवादी अजेंडे के भरोसे 2022 यूपी चुनावों में ब्राह्मण मतदाताओं को लेकर काफी आश्वस्त नजर आ रही हैं।

यूपी चुनाव 2022: बसपा के बाद अब सपा भी ब्राह्मण मतदाताओं को साधने मे जुटी

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