- सुबह से ही इतनी भीड़ उमड़ी की बंद करनी पड़ी दुकानें
न्यूज डेस्क। “इतनी पी जाए कि मिट जाए मैं और तू की तमीज यानी ये होश की दीवार गिरा दी जाए.” फरहत शहजाद की लिखी शायरी का हर शब्द लॉकडाउन 3.0 में शराब लेने उमड़े लोगों पर फिट बैठ रहा है. दरअसल, लॉकडाउन के दौरान लोगों को शराब पीने को नहीं मिली. लेकिन दिल्ली और यूपी सहित देश के कुछ राज्यों में जब शराब की दुकानें खुली तो सभी जगह भीड़ उमड़ी. यह कहा जाए कि नोटबंदी के दौरान एटीएम के सामने जैसे लाइन लगी थी. उससे कही ज्यादा लंबी लाइन शराब की लग गई है.केंद्रीय गृह मंत्रालय ने साफ निर्देश दिए हैं कि इस दौरान सोशल डिस्टेंसिंग का पूरा ख्याल रखा जाए. कई जगहों पर तो दुकानें खुलने से दो घंटे पहले ही लोग लाइन में खड़े हो गए और अपनी बारी का इंतजार करने लगे. सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कराने के लिए दुकानों के बाहर बैरिकेड्स लगाए गए हैं और लोगों के दूर-दूर खड़े होने के लिए पेंट से निशाना भी बनाए गए हैं. कोशिश यह है कि दुकान पर आने वाले लोग कोरोना की महामारी से बचे रहें. सामने आई तस्वीरों में देखा जा सकता है कि कहीं लोहे की तो कहीं लकड़ी की बैरिकेडिंग की गई है. जगह-जगह पुलिस भी तैनात की गई है कि इस दौरान स्थिति ना बिगड़े और कोरोना संक्रमण ना फैले. हालांकि, गृह मंत्रालय ने यह भी कहा है कि बार नहीं खोले जाएंगे और सार्वजनिक जगहों पर शराब पीने की भी अनुमति नहीं है.
दिल्ली में लगी एक किलोमीटर लंबी लाइन
दिल्ली में शराब की दुकानों पर सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं होने पर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने कहा कि कहीं भी अगर इस तरीके की घटना हो रही है, तो वह मुझे विचलित करती है. केंद्रीय मंत्री ने कहा, मुझे दुख और आश्चर्य होता है कि किसी भी सरकार ने ऐसा निर्णय लिया.दिल्ली के सभी जिले रेड जोन में हैं, इसके बावजूद दुकानें खोली गई हैं.दुकानों के बाहर सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने के लिए लोगों को दूर-दूर खड़े होने के निर्देश दिए गए हैं. साथ ही जमीन पर मार्किंग भी गई है.

देश की अर्थव्यवस्था में सहयोग देने का दावा
शराब खरीदने के लिए लाइन में लगे शराब प्रेमी का यहां तक दावा है कि कोरोनावायरस महामारी के दौरान शराब का सेवन करने वाले लोग देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करेंगे. उनका मानना है कि सरकार को सभी ठेके खोल देना चाहिए. क्योंकि शराब के ठेके नहीं खुलने के चलते 500 की बोतल 1500 रुपए में खरीदी जा रही है. ऐसे में कालाबाजारी को बढ़ावा मिल रहा था.
शहर में खुल गई कई दुकानें
सोमवार सुबह शहर की कई शराब की दुकानें खुल गईं और अचानक दुकान के आगे भीड़ हो गई. कई लोगों ने बड़ी संख्या में शराब खरीद भी ली. आबकारी विभाग को जब इस बात की सूचना मिली तो मौके पर पहुंचकर अधिकारियों ने दुकानें बंद करवाई. जोधपुर शहर में भ्रम की वजह से सुबह-सुबह शराब की कई दुकानें खुल गईं तो वहीं कई दुकानदारों ने गोले बनाकर सोशल डिस्टेंसिंग को पुख्ता किया.

छत्तीसगढ़ में 20 रुपए ज्यादा लिए
प्रदेश में शराब की दुकानें खोल दी गईं. रायपुर में शहर के अंदर की दुकानों को नहीं खोला गया. आउटर की दुकानों का ही संचालन किया जा रहा है. टाटीबंध, गोंदवारा जैसे इलाकों में स्थित शराब दुकानों में लोग खरीददारी करने पहुंचे. यहां भीड़ काबू से बाहर दिखी. शराब की बोलतों पर प्रिंट एमआरपी से 50 से 100 रुपए तक अधिक दुकानदार ले रहे हैं. देसी शराब में 20 से 30 रुपए अधिक लिए गए. दुकान संचालक ग्राहकों से दाम बढ़ने का दावा कर रहे हैं. तेज धूप भी शराब पसंद करने वालों के हौसले नहीं डिगा सकी. छाता लेकर भी कुछ लोग पहुंचे और देर तक अपनी बारी का इंतजार करते रहे. मोवा स्थित दुकान के बाहर 200 मीटर लंबी लाइन लगी दिखी.
कैसे होती है राज्यों की कमाई?
राज्यों की कमाई के मुख्य स्रोत हैं- राज्य जीएसटी, भू-राजस्व, पेट्रोल-डीजल पर लगने वाले वैट या सेल्स टैक्स, शराब पर लगने वाला एक्साइज और गाड़ियों आदि पर लगने वाले कई अन्य टैक्स. शराब पर लगने वाला एक्साइज टैक्स यानी आबकारी शुल्क राज्यों के राजस्व में एक बड़ा योगदान करता है.
तय से ज्यादा कीमत पर बेची तो होगी कार्रवाई
लॉकडाउन 3.0 के बीच उत्तर प्रदेश सरकार ने शराब की बिक्री को लेकर बड़ा फैसला किया और 4 मई से यानी सोमवार से राज्य में शराब की बिक्री की शुरू की गई. लॉकडाउन के दौरान ग्रीन और ऑरेंज जोन में शराब की बिक्री पर छूट दी गई है. हालांकि हॉटस्पॉट या कंटेनमेंट जोन में शराब की बिक्री पर पाबंदी थी. वहीं होटल और रेस्टोरेंट के बार में भी फिलहाल शराब नहीं बेची के आदेश हैं.आबकारी आयुक्त ने निर्देश दिए हैं कि प्रदेश भर में कहीं भी शराब की तय कीमत से अधिक दाम लिए जाने पर कार्रवाई की जाएगी. सभी लाइसेंस धारकों को निर्धारित मूल्य पर ही शराब बेचनी होगी. साथ ही आबकारी अधिकारियों को टेस्ट परचेजिंग करने के लिए भी कहा है.

