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भारत-पाक सीमा पर पैदा हुआ, नाम है बार्डर


भारत-पाक सीमा पर पैदा हुआ, नाम है बार्डर

अमृतसर। क्या हो यदि कुछ साल बाद कोई बच्चा आपसे कहे, भारत-पाक सीमा पर पैदा हुआ हूं, नाम है बार्डर। यह कुछ फिल्मी सा लगता है न। लेकिन यह न तो मजाक है और न ही कोई फिल्मी डायलाॅग बल्कि यह तो पीड़ा है उन 99 हिंदुओं की जो ढाई महीनें से अटारी बार्डर पर फंसे हैं। कागजात पूरे न होने के कारण उन्हें पाकिस्तान में प्रवेश करने नहीं दिया जा रहा और वह भारत के निवासी हैं नहीं। इन्हीं परिवारों में से एक के घर बेटे ने जन्म लिया तो पिता ने बच्चे का नाम ही बार्डर रख दिया।

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दसअसल कोराना काल से पहले पाकिस्तान में रहने वाले 99 हिंदुओं का एक दल मंदिरों के दर्शन करने और अपने रिश्तेदारों से मिलने के लिये भारत आया था। जब वह पाकिस्तान जाने के लिये अटारी बार्डर पहुंचे तो पता चला की उनकी वीजा की अवधि खत्म हो चुकी है। पाकिस्तान का नागरिक होने के बावजूद उन्हें पाकिस्तान में प्रवेश नहीं करने दिया गया। जिसके बाद उन्होंने पंजाब के अटारी बाॅर्डर पर ही डेरा जमा लिया। ढाई महीने से अमृतसर के अटारी-वाघा बाॅर्डर पर फंसे हुए पाकिस्तान के रहमिया के गांव राजनपुरा निवासी बालम राम की पत्नी ने बार्डर पर ही बच्चे को जन्म दिया। बार्डर पर हो रही परेशानियों को सदा याद रखने के लिये बालक राम ने अपने बच्चे का नाम ही बार्डर रख दिया। बालक राम का कहना है कि उसके बच्चे को याद रहना चाहिये की उसका जन्म कब, कहां और किन परिस्थितियों में हुआ था।

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दरअसल पाकिस्तान से भारत आने वाले हिंदू परिवारों को एजेंट द्वारा गलत जानकारी दिये जाने का खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। उनके पासपोर्ट पर 25 दिन का वीजा लगा था लेकिन एजेंट ने कहा कि वीजा तीन महीने का है। समय गुजरने के बाद जब वह वापस जाने को बार्डर पहुंचे तो उन्हें सीमा पार नहीं करने दी जा रही है। बालक राम का कहना है कि अब उन्हें अपने घर जन्में बार्डर के दस्तावेज और सर्टिफिकेट, पासपोर्ट आदि बनवाने हांेगे तभी उनका पूरा परिवार पाकिस्तान जा पायेगा।

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