भारत में कोविड-19 के संकट की दूसरी लहर के दौरान भूमि पेडनेकर ने ‘कोविड वारियर’ नामक पहल शुरू की जिसने पूरे भारत में अनगिनत लोगों की जान बचाई है। भूमि क्लाइमेट की पैरोकार हैं, जिन्होंने भारत के लोगों के बीच जागरूकता अभियान चलाकर पृथ्वी को बचाना अपनी जिंदगी का मिशन बना लिया है।
भूमि कहती हैं कि मुझे लगता है कि मेरा कण कण, यहां तक कि आज मेरी जो शख्सियत है, वह भी मेरी जिंदगी के अनुभवों का कुल योग है, और इनमें से अधिकतर अनुभव वहां से निकले हैं, जो मैंने अपने घर में देखा। मुझे याद है कि जब हम बच्चे थे और मैं स्कूल में थी, तब हमारे देश पर एक प्राकृतिक आपदा आई थी।
भूमि पेडनेकर कहती हैं कि मुझे लगता है कि जब आप किसी सत्ता के स्थान पर होते हैं या किसी प्रभावित करने वाली जगह पर बैठे होते हैं, तो कर्ज उतारना खास तौर पर आपका कर्तव्य बन जाता है। मतलबी बनना और आपने जो भी हासिल किया है, उसे पूरा का पूरा अपने पास रख लेना उचित नहीं है।
मैं समझती हूं कि आर्टिस्ट और एक्टर, खासकर मैं आज जिस मकाम पर हूं, वहां उन अनगिनत लोगों की वजह से पहुंची हूं, जिन्होंने मेरी कला को सराहा है और जिन्होंने मेरी एक्टिंग को पसंद किया है। मैं उन लोगों को नजरअंदाज कर ही नहीं सकती। उनका कर्ज उतारना मैं अपनी जिम्मेदारी समझती हूं और अपनी पर्सनल लाइफ में विभिन्न तरीकों से यह करने की कोशिश करती हूं।

